हिमाचल में बदला मौसम का मिजाज, ऊंची चोटियों पर हिमपात और कई क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि
हिमाचल में बदला मौसम का मिजाज, ऊंची चोटियों पर हिमपात और कई क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि

Post by : Himachal Bureau

May 30, 2026 10:32 a.m. 128

हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर मौसम ने करवट ले ली है। प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में जहां हल्का हिमपात दर्ज किया गया, वहीं कई मध्य और निचले क्षेत्रों में तेज आंधी, बारिश और भारी ओलावृष्टि ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। मौसम में आए इस अचानक बदलाव के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि लोगों को भीषण गर्मी से राहत जरूर मिली है, लेकिन किसानों और बागवानों के लिए यह मौसम नई चिंता लेकर आया है।

प्रदेश की प्रसिद्ध ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं रोहतांग दर्रा, शिंकुला दर्रा और बारालाचा दर्रा में हल्का हिमपात दर्ज किया गया। मई के अंतिम दिनों में हुई इस बर्फबारी ने एक बार फिर पहाड़ों को सफेद चादर से ढक दिया। ऊंचे इलाकों में तापमान गिरने के साथ मौसम पूरी तरह से ठंडा हो गया है। पर्यटकों के लिए यह दृश्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, लेकिन स्थानीय लोगों और यात्रियों को मौसम की वजह से अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

दूसरी ओर राजधानी शिमला और उससे जुड़े ऊपरी क्षेत्रों में मौसम ने अचानक उग्र रूप धारण कर लिया। दोपहर बाद तेज हवाओं के साथ शुरू हुई बारिश ने कुछ ही समय में भारी ओलावृष्टि का रूप ले लिया। शिमला शहर, मशोबरा, कुफरी, खड़ापत्थर तथा आसपास की करीब दस पंचायतों में बड़े आकार के ओले गिरने की सूचना मिली है। कई स्थानों पर खेत और बाग ओलों की सफेद परत से ढक गए। लोगों को वाहन चलाने और खुले स्थानों पर निकलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

मंडी जिले के करसोग क्षेत्र से भी भारी ओलावृष्टि की खबर सामने आई है। यहां किसानों और बागवानों को सबसे अधिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। सेब, नाशपाती, प्लम तथा अन्य फलों की फसलों पर ओलों की मार पड़ी है। कई स्थानों पर सब्जियों और अन्य मौसमी फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। बागवानों का कहना है कि इस समय फलों का विकास हो रहा है और ऐसे में ओलावृष्टि से उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि मौसम के इस बदलाव ने प्रदेशवासियों को भीषण गर्मी से काफी राहत पहुंचाई है। पिछले कई दिनों से बढ़ रहे तापमान में अचानक गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में दिन के तापमान में एक से लेकर 6.3 डिग्री सेल्सियस तक की कमी देखी गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण यह बदलाव देखने को मिला है।

तापमान में सबसे अधिक गिरावट कुफरी में दर्ज की गई, जहां अधिकतम तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस तक नीचे आ गया। इसके अलावा धर्मशाला में पांच डिग्री, मनाली में 4.8 डिग्री, कांगड़ा में 4.3 डिग्री तथा ऊना और नाहन में 3.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट रिकॉर्ड की गई। अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से एक से चार डिग्री तक कम दर्ज किया गया है। मौसम में आई इस नरमी के कारण लोगों ने गर्मी से राहत महसूस की है।

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार शनिवार को प्रदेश के अधिकांश जिलों में मौसम खराब बना रह सकता है। विभाग ने किन्नौर और लाहौल-स्पीति को छोड़कर अन्य सभी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई स्थानों पर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। साथ ही गरज के साथ बारिश और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव आगामी 3 जून तक प्रदेश में बना रह सकता है। इस अवधि के दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर हिमपात होने की संभावना है, जबकि मध्य और निचले क्षेत्रों में बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

दिन के तापमान के साथ-साथ न्यूनतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में रात के तापमान में एक से तीन डिग्री सेल्सियस तक की कमी देखी गई है। इससे सुबह और रात के समय ठंडक बढ़ गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों ने एक बार फिर गर्म कपड़ों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो मई महीने के दौरान प्रदेश में अब तक लगभग 44 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। यह सामान्य औसत से करीब 26 प्रतिशत कम है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश ने इस कमी को कुछ हद तक कम करने में मदद की है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में संतुलित वर्षा होती है तो खेती और बागवानी क्षेत्र को लाभ मिल सकता है।

प्रदेश के प्रमुख शहरों में दर्ज तापमान की बात करें तो शिमला में न्यूनतम तापमान 17.4 और अधिकतम 25.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुंदरनगर में न्यूनतम 18.4 और अधिकतम 34.9 डिग्री, भुंतर में 14.2 और 31.5 डिग्री, कल्पा में 10.0 और 21.4 डिग्री, धर्मशाला में 19.8 और 30.0 डिग्री तथा कांगड़ा में 20.9 और 32.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। इसी प्रकार ऊना में अधिकतम तापमान 39.6 डिग्री, नाहन में 33.2 डिग्री, केलंग में 18.4 डिग्री और सोलन में 35.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों तक प्रदेश में मौसम का यही बदला हुआ स्वरूप देखने को मिल सकता है। जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर किसानों और बागवानों की नजरें मौसम पर टिकी रहेंगी। विशेष रूप से सेब उत्पादक क्षेत्रों में ओलावृष्टि से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। यदि मौसम का यह दौर लंबे समय तक जारी रहता है तो बागवानी और कृषि क्षेत्र पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल पूरे प्रदेश में लोगों को मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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