Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
4 अप्रैल 1905 को कांगड़ा घाटी में आया भूकंप आज भी भारत के इतिहास में सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है। इस भयंकर भूकंप ने लगभग 20,000 लोगों की जान ले ली थी और एक लाख से अधिक भवन पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे। 121 साल बाद भी इस भूकंप की त्रासदी लोगों के जेहन में ताज़ा है। इसी याद को जीवंत रखने और भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने की तैयारी के लिए जिला हमीरपुर प्रशासन हर साल जागरुकता कार्यक्रम और मॉक ड्रिल का आयोजन करता है।
वीरवार को एसडीएम संजीत सिंह ने जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने आगामी जागरुकता कार्यक्रम और मॉक ड्रिल की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की। एसडीएम ने सभी विभागों के अधिकारियों से अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल और रैली के माध्यम से न केवल जनता में भूकंप और आपदा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी बल्कि बचाव और राहत कार्यों की कार्यप्रणाली का अभ्यास भी किया जा सकेगा।
एकजुटता रैली और मॉक ड्रिल का आयोजन
इस वर्ष भी 4 अप्रैल को सुबह साढ़े नौ बजे हमीरपुर उपायुक्त कार्यालय परिसर से एक Solidarity March (एकजुटता रैली) निकाली जाएगी। इस रैली का उद्देश्य लोगों को भूकंप और अन्य आपदाओं के प्रति जागरूक करना है और उन्हें यह संदेश देना है कि आपदा के समय एकजुट रहना कितना जरूरी है। रैली में स्थानीय नागरिकों, छात्र-छात्राओं, सरकारी कर्मचारियों और विभिन्न विभागों के अधिकारी भाग लेंगे।
रैली के बाद ही Mock Drill का आयोजन किया जाएगा। इस मॉक ड्रिल में भूकंप से क्षतिग्रस्त भवनों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया जाएगा। यह अभ्यास वास्तविक आपदा की स्थिति में बचाव और राहत कार्यों की दक्षता बढ़ाने में मदद करेगा। मॉक ड्रिल में आपातकालीन सेवाओं, पुलिस, फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीमों की भूमिका को भी दिखाया जाएगा।
भूकंप की त्रासदी से सबक
एसडीएम संजीत सिंह ने बताया कि कांगड़ा भूकंप केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं था, बल्कि यह लोगों और प्रशासन दोनों के लिए सीखने का अवसर भी था। उन्होंने कहा कि इस भयंकर भूकंप ने यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में किसी भी प्राकृतिक आपदा का सामना करने के लिए पहले से तैयारी करना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य के तहत हर साल जागरुकता कार्यक्रम और मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाता है।
भूकंप जैसी आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए प्रशासन समय-समय पर सुरक्षा उपायों और आपातकालीन योजनाओं का अभ्यास कराता है। मॉक ड्रिल में भवनों से फंसे लोगों को निकालना, प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करना और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना शामिल होता है। यह अभ्यास न केवल अधिकारियों के लिए बल्कि आम जनता के लिए भी महत्वपूर्ण होता है, ताकि वे वास्तविक आपदा की स्थिति में शांति और अनुशासन के साथ कार्य कर सकें।
एसडीएम ने सभी विभागों, स्कूलों, कॉलेजों और नागरिकों से अपील की है कि वे इस रैली और मॉक ड्रिल में भाग लेकर भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं और लोगों को जागरूक करें।
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