Post by : Khushi Joshi
धर्मशाला में 4 दिसंबर को होने वाली भाजपा की महाप्रदर्शन रैली और विधानसभा घेराव कार्यक्रम से पहले राजनीतिक तापमान तेज हो गया है। रैली स्थल को लेकर भाजपा और जिला प्रशासन के बीच मतभेद गहराने की आशंका है। भाजपा ने इस बड़े आयोजन के लिए जोरावर स्टेडियम को मुख्य स्थल घोषित किया है और पार्टी का दावा है कि इस रैली में प्रदेश भर से हजारों कार्यकर्ता शामिल होंगे। पार्टी पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया, जनसंपर्क अभियानों और जिलों में बैठकों के माध्यम से जोरावर स्टेडियम में बड़े जमावड़े का आह्वान कर रही है।
लेकिन प्रशासन का रुख इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रहा है। एसडीएम धर्मशाला की ओर से संकेत दिए गए हैं कि यदि रैली में भीड़ 5000 से अधिक हुई, तो सुरक्षा की दृष्टि से रैली स्थल को जोरावर स्टेडियम से बदलकर पुलिस ग्राउंड में कर दिया जाएगा। प्रशासन मानता है कि बड़ी भीड़ के बीच ट्रैफिक प्रबंधन, सुरक्षा घेरा, आपात सेवाओं की उपलब्धता और विधानसभा सत्र के दौरान होने वाली गतिविधियों को देखते हुए पुलिस ग्राउंड अधिक उपयुक्त स्थान है। इसी आधार पर पहले पेंशनर्स की विरोध रैली को भी जोरावर स्टेडियम से हटाकर पुलिस ग्राउंड में स्थानांतरित किया गया था। उस समय पेंशनर्स ने असंतोष जताते हुए पुलिस ग्राउंड से जोरावर स्टेडियम की ओर कूच किया था और तपोवन रोड पर चक्का जाम कर दिया था।
भाजपा का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर रैली स्थल बदलकर पार्टी के आयोजन को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि व्यापक प्रचार-प्रसार के बाद रैली स्थल बदलने से हजारों लोगों को भारी परेशानी होगी और भ्रम की स्थिति भी पैदा होगी। वहीं प्रशासन का कहना है कि निर्णय पूरी तरह भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और विधानसभा सत्र के समुचित संचालन को ध्यान में रखते हुए लिया जा रहा है।
इस बीच राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के महाघेराव से पहले धार्मिक, सामाजिक और अन्य संगठनों द्वारा भी विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया जा चुका है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अपनी मांगों के समर्थन में विधानसभा मार्च करने की तैयारी कर ली है। इसी तरह ओबीसी वर्ग के संगठनों ने 3 दिसंबर को विधानसभा घेराव की चेतावनी दी है, जिसके लिए प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग धर्मशाला पहुंचने वाले हैं। पहले भी ओबीसी समुदाय दो बड़े प्रदर्शन कर चुका है और इस बार भीड़ पहले से अधिक होने का अनुमान है।
आने वाले कुछ दिनों में धर्मशाला में राजनीतिक हलचल और बढ़ सकती है। विधानसभा के भीतर सियासी चर्चा की गूंज सुनाई देगी और बाहर विभिन्न संगठनों की आवाज़ एक साथ उठ सकती है। ऐसे माहौल में रैली स्थल को लेकर अंतिम फैसला भाजपा और जिला प्रशासन के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा। यदि अंतिम समय पर स्थल में बदलाव होता है, तो तनाव और भी बढ़ सकता है, जिसके संकेत अभी से मिल रहे हैं।
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