पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय में 16 हफ्ते का रक्षा कर्मियों का सफल प्रशिक्षण पूरा हुआ
पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय में 16 हफ्ते का रक्षा कर्मियों का सफल प्रशिक्षण पूरा हुआ

Author : Rajesh Vyas

March 28, 2026 11:06 a.m. 149

पालमपुर स्थित चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में भारतीय रक्षा कर्मियों के लिए आयोजित चौथा दीर्घकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा हो गया। यह प्रशिक्षण “सब्जी एवं बागवानी फसलों की संरक्षित खेती एवं मूल्य संवर्धन” विषय पर आधारित था। इस पूरे कार्यक्रम का उद्देश्य रक्षा कर्मियों को कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों की जानकारी देना और उन्हें रोजगार तथा उद्यमिता के अवसरों के लिए तैयार करना था।

यह 16 सप्ताह का प्रशिक्षण 8 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ था और शुक्रवार को विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय (DEE) में इसका समापन किया गया। इस प्रशिक्षण को महानिदेशालय पुनर्वास, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित किया गया था। इसमें कुल 20 रक्षा कर्मियों ने भाग लिया, जिनमें भारतीय सेना के 14 जवान और भारतीय नौसेना के 6 जवान शामिल थे।

समापन समारोह में प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. विनोद शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ मेजर प्रशांत यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। इस अवसर पर डॉ. विनोद शर्मा ने सभी प्रतिभागियों की मेहनत और सीखने की इच्छा की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम रक्षा कर्मियों को नए कौशल सीखने में मदद करते हैं, जो आगे चलकर उनके जीवन में बहुत उपयोगी साबित होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संरक्षित खेती और मूल्य संवर्धन जैसे विषय आज के समय में बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनसे किसान और प्रशिक्षित व्यक्ति अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

मेजर प्रशांत यादव ने भी विश्वविद्यालय के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण से रक्षा कर्मियों को व्यावहारिक ज्ञान और अनुभव प्राप्त हुआ है। यह ज्ञान उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद अपने नागरिक जीवन में नई दिशा देने में मदद करेगा। उन्होंने इसे एक उपयोगी और भविष्य निर्माण करने वाला कार्यक्रम बताया।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए.के. पांडा ने अपने संदेश में कहा कि इस तरह के क्षमता निर्माण कार्यक्रम कौशल विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि संरक्षित खेती और मूल्य संवर्धन से कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी होती है और इससे उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण रक्षा कर्मियों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा पाठ्यक्रम प्रभारी डॉ. लव भूषण ने प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस कोर्स में संरक्षित खेती की आधुनिक तकनीकों और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया गया। वहीं डॉ. अंकुर शर्मा ने महानिदेशालय पुनर्वास और उत्तरी कमान उधमपुर के साथ समन्वय की भूमिका निभाई और इस प्रकार के कार्यक्रमों को रक्षा कर्मियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कई अधिकारी, विभागाध्यक्ष और संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे। अंत में विश्वविद्यालय ने यह प्रतिबद्धता जताई कि भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रहेंगे, ताकि रक्षा कर्मियों को कृषि और उद्यमिता के क्षेत्र में और अधिक अवसर मिल सकें।

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