Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
ऊना जिले में विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने ध्वनि नियंत्रण नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि परीक्षा अवधि के दौरान विद्यार्थियों को शांत और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि पढ़ाई के समय अनावश्यक शोर विद्यार्थियों की एकाग्रता को प्रभावित करता है, जिससे उनके प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण प्रशासन ने सभी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य कर दिया है।
उपायुक्त ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के अनुसार रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक बिना पूर्व अनुमति किसी भी प्रकार के लाउडस्पीकर या ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि इन नियमों का पालन करना सभी नागरिकों के लिए आवश्यक है।
उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के लिए ध्वनि की अधिकतम सीमा भी स्पष्ट की। आवासीय क्षेत्रों में दिन के समय अधिकतम 55 डेसिबल और रात्रि में 45 डेसिबल तक ध्वनि की अनुमति है। वाणिज्यिक क्षेत्रों में यह सीमा क्रमशः 65 और 55 डेसिबल निर्धारित की गई है। उपायुक्त ने बताया कि अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों तथा न्यायालयों के 100 मीटर के दायरे को शांत क्षेत्र घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में दिन के समय अधिकतम 50 डेसिबल तथा रात्रि में 40 डेसिबल तक ही ध्वनि की अनुमति है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान इन क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है, क्योंकि यहां पढ़ाई और उपचार जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित होती हैं। जतिन लाल ने विशेष रूप से कहा कि शादी-ब्याह, धार्मिक कार्यक्रम, सामाजिक समारोह, जुलूस, जागरण और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में भी ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग निर्धारित समय और सीमा के अनुसार ही किया जाए।
उन्होंने आयोजकों से अपील की कि वे परीक्षा अवधि को ध्यान में रखते हुए ध्वनि की तीव्रता कम रखें और नियमों का पूर्ण पालन करें। उन्होंने कहा कि यह सभी की सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। उपायुक्त ने जिला पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था ध्वनि नियमों का उल्लंघन करती पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
साथ ही संबंधित अधिकारियों को भी नियमित निगरानी रखने और शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि परीक्षा अवधि के दौरान पूरे जिले में शांत और अनुशासित वातावरण बना रहे। उपायुक्त ने सभी धार्मिक, सामाजिक और सार्वजनिक संस्थानों के साथ-साथ आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि परीक्षा केवल विद्यार्थियों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि यदि हम सभी मिलकर नियमों का पालन करेंगे, तो विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए उपयुक्त वातावरण मिलेगा और वे अपनी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। अंत में उपायुक्त ने कहा कि परीक्षा अवधि के दौरान शांत, सौहार्दपूर्ण और अनुशासित वातावरण बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इससे विद्यार्थियों को मानसिक शांति मिलेगी और वे पूरी एकाग्रता के साथ अपनी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे।
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