डलहौजी में 100 साल पुराने डाकघर को बंद करने की तैयारी जनता ने विरोध जताया
डलहौजी में 100 साल पुराने डाकघर को बंद करने की तैयारी जनता ने विरोध जताया

Post by : Ram Chandar

Feb. 21, 2026 4:24 p.m. 117

डलहौजी (चंबा): ब्रिटिश काल से संचालित डलहौजी कैंट का ऐतिहासिक डाकघर बंद किए जाने की चर्चाओं ने स्थानीय लोगों में गहरी चिंता और रोष पैदा कर दिया है। इस मामले पर पूर्व प्रधान और क्षेत्र के कई वरिष्ठ लोग डाक विभाग से आग्रह कर रहे हैं कि डाकघर को बंद करने का निर्णय तत्काल स्थगित किया जाए और इसे यथावत बनाए रखा जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह डाकघर केवल डाक सेवाओं का केंद्र नहीं है, बल्कि डलहौजी क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक भी है। इसे बंद करने का निर्णय न केवल स्थानीय जनता के लिए असुविधा का कारण बनेगा, बल्कि इस क्षेत्र की विरासत और इतिहास पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

पूर्व प्रधान त्रिलोक ने कहा कि यह डाकघर वर्षों से लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करता रहा है। वहीं, अनिल शर्मा ने बताया कि उनकी उम्र लगभग 72 वर्ष है और उन्होंने बचपन से इस डाकघर को संचालित होते देखा है। उनका कहना है कि यह डाकघर लगभग 100 साल पुराना है और इसे बंद करना न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से अनुचित है बल्कि स्थानीय जनता के हित के खिलाफ भी होगा।

स्थानीय निवासी सुशील शर्मा और वीर सिंह ने भी डाक विभाग से अपील की है कि इस ऐतिहासिक डाकघर को यथावत रखा जाए और बंद करने का निर्णय दोबारा विचाराधीन किया जाए। उनका कहना है कि यह डाकघर क्षेत्रवासियों, बुजुर्गों और व्यापारियों के लिए एक महत्वपूर्ण सेवा केंद्र है, और इसके बंद होने से लोगों को दैनिक जीवन में कई गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

स्थानीय लोग चेतावनी दे रहे हैं कि यदि विभाग इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले डाकघर को बंद करने का फैसला करता है, तो इसके विरोध में क्षेत्र के नागरिक संगठित होकर आवाज उठाएंगे। उनका कहना है कि डलहौजी का यह डाकघर केवल डाक सेवाओं का केंद्र नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के लोगों की यादों और सामाजिक जीवन का भी अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

इस बीच, डाक विभाग से लोगों ने अनुरोध किया है कि वे स्थानीय समुदाय की भावनाओं और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें और इस डाकघर को भविष्य में भी लोगों की सेवा के लिए चालू रखें।

डलहौजी के निवासी और क्षेत्रीय संगठन इस मुद्दे पर सक्रिय हैं और उनका मानना है कि यह कदम स्थानीय विरासत और संस्कृति के संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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