मिडल क्लास जनरल कैटेगरी के विद्यार्थियों को भी फीस में रियायत देने की उठी मांग
मिडल क्लास जनरल कैटेगरी के विद्यार्थियों को भी फीस में रियायत देने की उठी मांग

Author : Man Singh

Feb. 20, 2026 10:58 a.m. 133

देश में शिक्षा को लेकर लंबे समय से विभिन्न वर्गों के लिए अलग-अलग रियायतें और आरक्षण नीतियां लागू हैं। इन नीतियों का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाना है। लेकिन अब मिडल क्लास जनरल कैटेगरी से जुड़े परिवारों और विद्यार्थियों की ओर से यह मांग उठ रही है कि उन्हें भी फीस में रियायत दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कई बार वे आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद किसी भी प्रकार की सहायता से वंचित रह जाते हैं।

मिडल क्लास परिवारों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई, रोजमर्रा के खर्च और सीमित आय के कारण उच्च शिक्षा या तकनीकी शिक्षा के लिए भारी फीस जमा करना उनके लिए आसान नहीं होता। ऐसे में सरकार को एक संतुलित और समान नीति बनानी चाहिए, जिससे हर जरूरतमंद विद्यार्थी को सहायता मिल सके।

कई सरकारी और अर्धसरकारी संस्थानों में विभिन्न श्रेणियों के विद्यार्थियों के लिए फीस संरचना अलग-अलग है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई SC, ST या OBC वर्ग का अभ्यर्थी किसी नॉलेज कंप्यूटर एजुकेशन सेंटर में प्रवेश लेता है, तो उसकी फीस लगभग 700 रुपये प्रति अभ्यर्थी होती है। वहीं उसी कोर्स में यदि जनरल कैटेगरी का विद्यार्थी प्रवेश लेता है, तो उसे लगभग 10,000 रुपये तक की फीस देनी पड़ती है।

इस प्रकार का अंतर मिडल क्लास जनरल कैटेगरी के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। कई परिवारों के लिए इतनी बड़ी राशि एक साथ जमा करना संभव नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप, कई छात्र या तो एडमिशन ही नहीं ले पाते या अपनी पसंद के कोर्स से वंचित रह जाते हैं।

मिडल क्लास परिवार अक्सर सीमित आय पर निर्भर होते हैं। घर का किराया, बिजली-पानी का बिल, बच्चों की स्कूल फीस, चिकित्सा खर्च और अन्य घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए अतिरिक्त राशि निकालना कठिन हो जाता है।

ऐसे में जब किसी कोर्स की फीस 10,000 रुपये या उससे अधिक हो, तो वह कई परिवारों के लिए एक बड़ी बाधा बन जाती है। जबकि वही कोर्स किसी अन्य श्रेणी के विद्यार्थी के लिए 700 रुपये में उपलब्ध हो, तो असमानता का अनुभव होना स्वाभाविक है।

मिडल क्लास परिवारों का मानना है कि आर्थिक आधार पर सहायता मिलनी चाहिए, ताकि वास्तव में जरूरतमंद विद्यार्थियों को लाभ मिल सके, चाहे वे किसी भी कैटेगरी से क्यों न हों।

विशेष रूप से कंप्यूटर एजुकेशन सेंटर के विभिन्न कोर्स जैसे A, B और C लेवल के कार्यक्रमों में फीस को लेकर समानता की मांग उठ रही है। मांग की जा रही है कि चाहे कोई भी कोर्स हो, उसकी फीस सभी विद्यार्थियों के लिए समान हो या फिर आर्थिक स्थिति के आधार पर रियायत दी जाए।

तकनीकी और कंप्यूटर शिक्षा आज के समय में रोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि मिडल क्लास का कोई छात्र फीस के कारण इस शिक्षा से वंचित रह जाता है, तो यह न केवल उसके व्यक्तिगत विकास में बाधा है, बल्कि देश के विकास के लिए भी नुकसानदायक है।

शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की नींव माना जाता है। यदि शिक्षा तक पहुंच में असमानता होगी, तो समाज में भी असंतुलन बना रहेगा। इसलिए यह मांग की जा रही है कि सरकार ऐसी नीति बनाए जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर मिडल क्लास जनरल कैटेगरी के विद्यार्थियों को भी फीस में रियायत मिले।

इस तरह का प्रावधान केवल एक संस्थान तक सीमित न होकर लगभग सभी सरकारी और अर्धसरकारी संस्थानों में लागू होना चाहिए। इससे हर विद्यार्थी को समान अवसर मिलेगा और वह अपनी योग्यता के अनुसार आगे बढ़ सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार आर्थिक आधार पर सहायता देने की नीति को और मजबूत करे, तो इससे समाज में संतुलन आएगा। इससे शिक्षा का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचेगा और प्रतिभाशाली विद्यार्थी केवल फीस के कारण पीछे नहीं रहेंगे।

यदि मिडल क्लास जनरल कैटेगरी के विद्यार्थियों को भी रियायत मिलेगी, तो वे बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे, कौशल विकसित कर सकेंगे और भविष्य में देश की अर्थव्यवस्था और विकास में योगदान दे सकेंगे।

इस तरह की नीति न केवल सामाजिक संतुलन स्थापित करेगी, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम साबित होगी।

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