Post by : Ram Chandar
कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) हिमाचल से बाहरी राज्यों में सेब, जापानी फल, प्लम और अनार के पौधे अब कुरियर सेवा के माध्यम से भेजे जा रहे हैं। पहले पौधों को जीप या अन्य वाहनों में लोड किया जाता था, लेकिन अब बागवानों ने सुरक्षित, तेज़ और आधुनिक तरीका अपनाया है, जिससे पौधों की डिलीवरी में समय और लागत दोनों की बचत हो रही है।
कुल्लू जिले में इस सीजन तक लगभग 50,000 से अधिक पौधे कुरियर के माध्यम से जम्मू-कश्मीर, असम, कोलकाता, हैदराबाद और अन्य स्थानों पर भेजे जा चुके हैं। यह बदलाव न केवल बागवानी के क्षेत्र में एक नया ट्रेंड बन गया है, बल्कि नर्सरी मालिकों और बागवानों के लिए व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाने में भी मदद कर रहा है।
पौधों की पैकिंग भी अब हाईटेक और सुरक्षित तरीके से की जा रही है। 15 किलो की पैकिंग में लगभग 30 बड़े पौधे भेजे जाते हैं, और खर्च केवल 1,000 रुपये आता है, जो पारंपरिक वाहनों की तुलना में काफी कम है। इसके अलावा 10 किलो और छोटी पैकिंग भी तैयार की जाती है, ताकि ऑर्डर के हिसाब से पौधों को अलग-अलग राज्यों और स्थानों तक भेजा जा सके।
कुल्लू जिले में चार प्रमुख कुरियर एजेंसियां कार्यरत हैं, और उन्हें लगातार प्रदेश और बाहरी राज्यों से ऑर्डर मिल रहे हैं। पीक सीजन में ऑर्डर चार दिनों के भीतर डिलीवरी किए जा रहे हैं, जिससे बागवानों और नर्सरी मालिकों की कार्यप्रणाली में काफी सुधार हुआ है। फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन के महासचिव सुनील राणा ने कहा कि कुल्लू में तैयार पौधों की मांग लगातार बढ़ रही है और यह बागवानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक है।
कुल्लू की नर्सरियों में हर साल लाखों सेब, प्लम, जापानी फल और अनार के पौधे तैयार किए जाते हैं। नर्सरी व्यवसाय से हर साल करोड़ों रुपये का कारोबार होता है, और इस व्यवसाय से बागवानों की आय में भी वृद्धि हो रही है। अब कुरियर के माध्यम से पौधों को सुरक्षित और तेज़ डिलीवरी के साथ भेजने से यह व्यवसाय और अधिक सफल और लाभकारी बन गया है।
बागवानों का कहना है कि इस नई प्रणाली से पौधों की सुरक्षा बढ़ी है, ऑर्डर समय पर पहुंच रहे हैं, और बागवानी का व्यवसाय हिमाचल प्रदेश में नई ऊंचाइयों तक पहुँच रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका न केवल बागवानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि हिमाचल की बागवानी उद्योग के लिए भी स्थायी और आधुनिक विकास का रास्ता खोलता है।
इस नई प्रणाली से कुल्लू जिले के नर्सरी मालिक और बागवान अब बाहरी राज्यों के ग्राहकों तक आसानी से पौधे भेज सकते हैं, जिससे हिमाचल के बागवानों का व्यवसाय और प्रतिष्ठा दोनों बढ़ रही है।
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