हिमाचल में विधवा महिलाओं की बेटियों को उच्च शिक्षा में वित्तीय मदद
हिमाचल में विधवा महिलाओं की बेटियों को उच्च शिक्षा में वित्तीय मदद

Post by : Ram Chandar

Feb. 20, 2026 3:08 p.m. 119

शिमला (हिमाचल प्रदेश) हिमाचल प्रदेश सरकार ने विधवा महिलाओं की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। इसके तहत अब बेटियों को प्रदेश में और प्रदेश से बाहर स्थित सरकारी संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने पर आर्थिक मदद मिलेगी। यह कदम इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के विस्तार के रूप में लिया गया है।

योजना का उद्देश्य विधवा, निराश्रित या तलाकशुदा महिलाओं तथा दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में समग्र सहयोग प्रदान करना है। सरकार ने योजना में संशोधन को स्वीकृति दी है, जिसके अनुसार पात्र बेटियों को 27 वर्ष की आयु तक लाभ मिलेगा।

संशोधित प्रावधानों के अंतर्गत राज्य से बाहर स्थित सरकारी संस्थानों में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की छात्राओं को किराया या पीजी आवास शुल्क के लिए अधिकतम 10 महीनों तक प्रति माह 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह सुविधा तब दी जाएगी जब सरकारी छात्रावास की सुविधा उपलब्ध न हो।

योजना के अंतर्गत विभिन्न पाठ्यक्रम शामिल हैं जैसे इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, व्यवसाय एवं प्रबंधन, चिकित्सा एवं संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान, लॉ, कंप्यूटर एप्लीकेशन और आईटी सर्टिफिकेशन, एजुकेशन एंड ह्यूमैनिटीज़, राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) के पाठ्यक्रम, शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के पाठ्यक्रम तथा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कार्यक्रम।

वर्तमान में योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक मासिक वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अलावा राज्य के सरकारी संस्थानों में अध्ययनरत लाभार्थियों की टयूशन फीस, छात्रावास शुल्क और अन्य संबंधित शैक्षणिक व्यय भी सरकार द्वारा वहन किए जा रहे हैं।

विस्तारित प्रावधानों के अंतर्गत लगभग 20 प्रतिशत छात्राएं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का चयन कर सकती हैं, जिसके लिए अनुमानित 1 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बजट प्रावधान किया गया है। इस योजना को विस्तार देने से लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि होने का अनुमान है।

इस वित्त वर्ष के लिए राज्य सरकार ने इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत 31.01 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसमें से 3 फरवरी, 2026 तक 22.96 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि योजना का उद्देश्य लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना और आर्थिक बाधा के बिना उनकी शिक्षा पूरी करना है। सरकार समाज के वंचित वर्गों के बच्चों तक समान शिक्षा के अवसर सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

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