पालचरा में भूस्खलन के बाद सुरेंद्र शौरी ने NHPC से मांगी जवाबदेही, प्रभावित परिवारों से मिले
पालचरा में भूस्खलन के बाद सुरेंद्र शौरी ने NHPC से मांगी जवाबदेही, प्रभावित परिवारों से मिले

Author : Prem Sagar

Sept. 22, 2026 2:20 p.m. 105

सैंज घाटी के ग्राम पंचायत रैला-I के पालचरा गांव में जल विद्युत परियोजना की भूमिगत एडिट सुरंग से जल रिसाव के बाद हुए भूस्खलन से मकानों और अन्य भवनों को नुकसान पहुंचने का मामला सामने आया है। विधायक सुरेंद्र शौरी ने मौके पर पहुंचकर प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया और नुकसान का सामना कर रहे परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। विधायक ने घटनास्थल का निरीक्षण करते हुए परियोजना से जुड़े अधिकारियों और प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कराने तथा प्रभावित परिवारों को राहत देने की मांग उठाई।

भूमिगत एडिट से जल रिसाव के बाद हुआ भूस्खलन

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, पालचरा गांव में जल विद्युत परियोजना की भूमिगत एडिट सुरंग से जल रिसाव के बाद भूस्खलन की स्थिति बनी। इस घटना में दो मकानों सहित अन्य भवनों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। मौके का निरीक्षण करने के बाद सुरेंद्र शौरी ने कहा कि जल विद्युत परियोजनाएं क्षेत्र के विकास और देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विकास की कीमत स्थानीय लोगों की सुरक्षा और उनके घरों को नुकसान के रूप में नहीं चुकाई जानी चाहिए।

तकनीकी और वैज्ञानिक जांच की मांग

सुरेंद्र शौरी ने कहा कि पालचरा की घटना को केवल सामान्य प्राकृतिक घटना या तकनीकी चूक मानकर मामले को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, भूमिगत एडिट से जल रिसाव और उसके बाद भूस्खलन की स्थिति गंभीर विषय है। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र के कुछ अन्य स्थानों पर भी भूमिगत जल सुरंगों से जल रिसाव की शिकायतें सामने आई हैं और ग्रामीणों ने इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई है। विधायक ने इन सभी स्थानों की तकनीकी और वैज्ञानिक जांच विशेषज्ञों की टीम से करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के माध्यम से भू-तकनीकी स्थिति का विस्तृत आकलन होने से संभावित जोखिमों की पहचान की जा सकेगी और भविष्य में किसी बड़ी घटना से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।

प्रभावित परिवारों के नुकसान का आकलन कराने की मांग

विधायक ने प्रभावित परिवारों के मकानों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का निष्पक्ष और पारदर्शी आकलन कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि नुकसान का सही मूल्यांकन होने के बाद प्रभावित परिवारों को उचित राहत और मुआवजा दिलाने के लिए वह प्रशासन तथा संबंधित परियोजना प्रबंधन के समक्ष मामला उठाएंगे। सुरेंद्र शौरी ने प्रभावित क्षेत्र में तत्काल सुरक्षा और राहत के आवश्यक उपाय करने की बात भी कही। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से प्रभावित परिवारों की स्थिति को देखते हुए जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया।

स्थानीय लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात

सुरेंद्र शौरी ने कहा कि परियोजना के निर्माण और संचालन के दौरान स्थानीय लोगों की सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजना की भूमिगत संरचनाओं से जल रिसाव जैसी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उनकी जांच आवश्यक है। विधायक ने यह भी कहा कि स्थानीय लोगों के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, प्रभावित परिवारों के नुकसान की भरपाई को लेकर संबंधित परियोजना प्रबंधन की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

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सैंज घाटी के योगदान का भी किया उल्लेख

सुरेंद्र शौरी ने कहा कि सैंज घाटी ने देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में घाटी के लोगों का भी अधिकार है कि विकास परियोजनाओं से उन्हें लाभ मिले और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना के कारण स्थानीय स्तर पर समस्या उत्पन्न होने पर उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और प्रभावित लोगों को समय पर राहत मिलनी चाहिए।

नोट: उपलब्ध जानकारी में NHPC प्रबंधन का पक्ष शामिल नहीं है। इसलिए जल रिसाव, भूस्खलन के कारण और नुकसान की जिम्मेदारी से जुड़े दावों को विधायक के बयान और स्थानीय शिकायतों के संदर्भ में रखा गया है।

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