Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के समीरपुर गांव से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति और क्रिकेट प्रशासन में अपनी पहचान बनाने वाले अनुराग सिंह ठाकुर का जन्म 24 अक्टूबर 1974 को हुआ था। उनका जीवन क्रिकेट, संगठनात्मक कार्य, राजनीति, संसदीय जिम्मेदारियों और सेना से जुड़े अनुभवों का मिश्रण रहा है। जन्मदिन के अवसर पर उनके सफर के प्रमुख पड़ावों पर नजर डालना हिमाचल प्रदेश की राजनीति और खेल जगत में उनकी भूमिका को समझने का अवसर देता है। अनुराग ठाकुर के पिता प्रेम कुमार धूमल हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं और उनकी माता का नाम शीला धूमल है। राजनीतिक परिवार से संबंध होने के बावजूद अनुराग ठाकुर ने क्रिकेट प्रशासन और युवा राजनीति सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई।
अनुराग ठाकुर की शुरुआती रुचि क्रिकेट में थी। उन्होंने पंजाब की जूनियर टीमों के साथ खेला और अंडर-16 तथा अंडर-19 स्तर पर अपनी भूमिका निभाई। बाद में उनका झुकाव क्रिकेट प्रशासन की ओर बढ़ा और वह हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ से जुड़े।
कम उम्र में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ की अध्यक्षता संभालना उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। उनके कार्यकाल के दौरान राज्य में क्रिकेट सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान दिया गया। धर्मशाला का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम हिमाचल की खेल पहचान का प्रमुख केंद्र बना।
अनुराग ठाकुर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। वह सितंबर 2011 में संयुक्त सचिव और मार्च 2015 में सचिव बने। मई 2016 में उन्हें बीसीसीआई अध्यक्ष चुना गया। हालांकि, फरवरी 2017 में उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। क्रिकेट प्रशासन में उनकी यह यात्रा हिमाचल से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की उल्लेखनीय मिसाल रही।
अनुराग ठाकुर ने मई 2008 में हमीरपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव जीतकर पहली बार संसद में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी जीत हासिल की। इस तरह वह पांच बार हमीरपुर से सांसद चुने गए। युवा राजनीति में भी उन्होंने जिम्मेदारियां निभाईं और भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। संगठनात्मक गतिविधियों के जरिए उनकी पहचान राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत हुई।
वर्ष 2019 में अनुराग ठाकुर ने वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री के रूप में काम किया। जुलाई 2021 में उन्हें सूचना एवं प्रसारण तथा युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। इन पदों पर उनका काम सरकारी नीतियों, खेल गतिविधियों, युवाओं से जुड़े कार्यक्रमों और सूचना-प्रसारण के क्षेत्र से संबंधित रहा।
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अनुराग ठाकुर को 29 जुलाई 2016 को प्रादेशिक सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन मिला। वर्ष 2021 में उन्हें कैप्टन के पद पर पदोन्नत किया गया। उनका यह अनुभव राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग एक महत्वपूर्ण पहलू है।
संसद में अनुराग ठाकुर ने विभिन्न समितियों में जिम्मेदारियां संभालीं। उन्हें 2011 में युवा सांसद पुरस्कार मिला। वर्ष 2014 में विश्व आर्थिक मंच ने उन्हें युवा वैश्विक नेता के रूप में मान्यता दी और 2019 में उन्हें संसद रत्न पुरस्कार भी मिला।
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