कांगड़ा की दीक्षा सोनी की प्रेरक कहानी, डॉक्टर से बनीं सेना में कैप्टन
कांगड़ा की दीक्षा सोनी की प्रेरक कहानी, डॉक्टर से बनीं सेना में कैप्टन

Author : Rajesh Vyas

Oct. 24, 2026 12:15 p.m. 110

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की बेटी दीक्षा सोनी की कहानी मेहनत, लगन और देशसेवा के जज्बे की मिसाल है। चिकित्सा के क्षेत्र में पढ़ाई पूरी कर लोगों की सेवा करने वाली दीक्षा ने आगे चलकर भारतीय सेना में शामिल होने का फैसला किया। उन्होंने कठिन चयन प्रक्रिया में सफलता हासिल की और सेना में कैप्टन के पद तक पहुंचीं। वर्तमान में वह हिमाचल प्रदेश के योल सैन्य क्षेत्र में सेवाएं दे रही हैं। दीक्षा की उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने चिकित्सा और सैन्य सेवा, दोनों क्षेत्रों में अपना योगदान दिया। उनकी यात्रा उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो पढ़ाई के साथ अपने करियर में बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं।

19 साल की उम्र में एमबीबीएस में मिला दाखिला

कांगड़ा बस स्टैंड के पास स्थित सेवकरा गांव में जन्मीं दीक्षा सोनी ने बचपन से ही पढ़ाई में रुचि दिखाई। उनके पिता सुरिंदर सोनी सुनार का काम करते हैं, जबकि उनकी माता सुनीता सोनी सिलाई अध्यापिका हैं। परिवार ने उनकी शिक्षा और आगे बढ़ने की इच्छा को प्रोत्साहित किया। दीक्षा की शुरुआती पढ़ाई कांगड़ा के महर्षि विद्या मंदिर पब्लिक स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने डीएवी स्कूल, कांगड़ा से जमा दो की पढ़ाई पूरी की। चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने का लक्ष्य लेकर उन्होंने मेहनत की और महज 19 साल की उम्र में चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश हासिल कर लिया। उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। लगभग 24 साल की उम्र में डॉक्टर बनने के बाद उन्होंने चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में कदम रखा।

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हिमाचल के अस्पतालों में दीं सेवाएं

चिकित्सा की पढ़ाई पूरी करने के बाद दीक्षा ने हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में काम किया। इस दौरान उन्होंने टांडा मेडिकल कॉलेज, ज्वालामुखी और कांगड़ा के सिविल अस्पताल में सेवाएं दीं। अस्पतालों में काम करते हुए उन्हें मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव मिला। हालांकि, उनके मन में देश की सेवा करने के लिए भारतीय सेना में जाने की इच्छा भी थी। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने सेना में चिकित्सक अधिकारी बनने का निर्णय लिया।

पहले प्रयास में पास की कठिन चयन प्रक्रिया

दीक्षा ने सेना में प्रवेश पाने के लिए अल्पकालीन सेवा आयोग की चयन प्रक्रिया की तैयारी शुरू की। उस समय उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चिकित्सकों के लगभग 300 पदों में महिलाओं के लिए करीब 30 पद निर्धारित थे। ऐसे में चयन प्रक्रिया में सफलता हासिल करना आसान नहीं था। दीक्षा ने अपने पहले ही प्रयास में चयन प्रक्रिया पास कर ली। इसके बाद 15 अक्टूबर 2020 को उनकी तैनाती योल छावनी में कैप्टन के पद पर हुई। चिकित्सा के क्षेत्र से सेना तक का उनका यह सफर उनकी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।

माता-पिता और परिवार को देती हैं सफलता का श्रेय

दीक्षा सोनी अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, ताया-ताई और नाना को देती हैं। परिवार के सहयोग और प्रोत्साहन ने उन्हें अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनका मानना है कि भारतीय सेना का हिस्सा बनकर देश की सेवा करना गर्व की बात है। चिकित्सा सेवा के अनुभव को सैन्य जीवन के अनुशासन के साथ जोड़कर वह अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।

कांगड़ा और हिमाचल की युवतियों के लिए प्रेरणा

दीक्षा सोनी की कहानी बताती है कि सफलता के लिए स्पष्ट लक्ष्य, निरंतर मेहनत और परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने पहले चिकित्सा की पढ़ाई पूरी की, फिर अस्पतालों में सेवाएं दीं और अंततः सेना में अधिकारी बनने का लक्ष्य हासिल किया। उनकी उपलब्धि हिमाचल प्रदेश, खासकर कांगड़ा जिले की उन युवतियों के लिए प्रेरणा है, जो चिकित्सा, रक्षा सेवाओं या अन्य चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में करियर बनाना चाहती हैं। दीक्षा का सफर यह संदेश देता है कि सही दिशा में लगातार प्रयास करने से कई अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं।

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