Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हिमाचल प्रदेश के नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने विद्यार्थियों और शिक्षकों से पढ़ाई को केवल डिग्री और अंकों तक सीमित न रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि युवाओं को रचनात्मक सोच विकसित करने, अनुसंधान करने, नए विचारों पर काम करने और समाज के सामने मौजूद समस्याओं का व्यावहारिक समाधान खोजने पर भी ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, ज्ञान का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका इस्तेमाल लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और प्रदेश तथा देश की प्रगति में किया जा सके। मंत्री सोमवार को हमीरपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के सभागार में मिनर्वा स्टडी सर्कल की ओर से आयोजित प्रतिभा खोज परीक्षा-2026 ‘हिल क्वैस्ट’ के पुरस्कार वितरण समारोह में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में प्रदेशभर से परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
राजेश धर्माणी ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शिक्षा के साथ Innovation, Research और Entrepreneurship को बढ़ावा देना जरूरी है। विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई से प्राप्त ज्ञान का उपयोग वास्तविक जीवन की चुनौतियों को समझने और उनके समाधान तैयार करने में करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी डिग्री और ज्ञान का इस्तेमाल समस्याओं को हल करने के लिए नहीं कर पाता, तो शिक्षा का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। देश और प्रदेश को ऐसे युवाओं की जरूरत है, जो नए विचारों के साथ काम करें और विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने मिनर्वा स्टडी सर्कल जैसे शैक्षणिक संस्थानों के प्रयासों को भी सराहनीय बताया।
मंत्री ने विद्यार्थियों को जीवन में असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए निरंतर मेहनत, रचनात्मक सोच और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण जरूरी है। युवाओं को व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल करने के साथ-साथ समाज और देश के लिए भी योगदान देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों को केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानते हुए नए प्रयोग करने, सवाल पूछने और अपनी सोच को व्यापक बनाने का प्रयास करना चाहिए।
आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उल्लेख करते हुए राजेश धर्माणी ने विद्यार्थियों को इनके उचित उपयोग की सलाह दी। उन्होंने कहा कि Artificial Intelligence और अन्य आधुनिक उपकरण पढ़ाई तथा काम को आसान बना सकते हैं, लेकिन विद्यार्थियों को पूरी तरह इन पर निर्भर नहीं होना चाहिए। तकनीक का उपयोग करते समय अपनी समझ, मौलिक सोच और रचनात्मकता को बनाए रखना जरूरी है। उनका संदेश था कि तकनीक विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को मजबूत करे, न कि स्वतंत्र रूप से सोचने और नए समाधान तलाशने की आदत को कमजोर बनाए।
राजेश धर्माणी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में कई सुधार किए हैं। विद्यार्थियों को व्यापक अनुभव देने के लिए शैक्षणिक भ्रमण और विदेशों की अनुभव यात्राएं आयोजित की गई हैं। इसके साथ ही प्रदेश में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालय स्थापित किए गए हैं, ताकि सामान्य परिवारों के बच्चों को भी बेहतर शैक्षणिक अवसर मिल सकें और वे अन्य विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें।
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समारोह के दौरान प्रतिभा खोज परीक्षा-2026 ‘हिल क्वैस्ट’ में प्रदेशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम से पहले मिनर्वा स्टडी सर्कल के संचालकों राकेश चंदेल और प्रवेश चंदेल सहित संस्थान की टीम ने मंत्री, अन्य अतिथियों, शिक्षकों और मेधावी विद्यार्थियों का स्वागत किया। टीम ने संस्थान की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की।
इस कार्यक्रम का मुख्य संदेश यह है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना या प्रमाणपत्र हासिल करना नहीं, बल्कि ज्ञान के माध्यम से जीवन की समस्याओं का समाधान निकालना भी है। विद्यार्थियों को अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और आधुनिक तकनीक की समझ विकसित करते हुए अपनी रचनात्मक क्षमता को मजबूत करना चाहिए।
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