बीड़-बिलिंग से उड़ान के बाद कुल्लू की बर्फीली पहाड़ियों में फंसा पायलट
बीड़-बिलिंग से उड़ान के बाद कुल्लू की बर्फीली पहाड़ियों में फंसा पायलट

Post by : Himachal Bureau

Oct. 24, 2026 4:49 p.m. 124

हिमाचल प्रदेश में पैराग्लाइडिंग से जुड़ी एक घटना सामने आई है। विश्व प्रसिद्ध बीड़-बिलिंग स्थल से उड़ान भरने के बाद एक पैराग्लाइडर कुल्लू जिले की बर्फ से ढकी पहाड़ियों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद पायलट गौतम कुमार भारती दुर्गम इलाके में फंस गए। सूचना मिलने के बाद प्रशासन और पुलिस ने उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए बचाव अभियान शुरू कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, पायलट जिस स्थान पर फंसे हैं, वह काफी ऊंचाई पर स्थित है। वहां भारी बर्फ होने और पहाड़ी रास्तों के कठिन होने के कारण बचाव दल के सामने कई चुनौतियां हैं। ऐसे हालात में पायलट तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित नीचे लाना आसान नहीं है। हालांकि, राहत की बात यह है कि पायलट से रेडियो के माध्यम से संपर्क बना हुआ है। उन्होंने अपने जीपीएस निर्देशांक भी कंट्रोल रूम को भेजे हैं, जिससे बचाव दल को उनकी लोकेशन का पता लगाने में मदद मिली है।

आधी रात को कंट्रोल रूम को मिली सूचना

जानकारी के मुताबिक, घटना की सूचना रात करीब 12 बजकर 20 मिनट पर कुल्लू कंट्रोल रूम को दी गई। वरुण सिंह नामक व्यक्ति ने प्रशासन को बताया कि उनके मित्र और पैराग्लाइडर पायलट गौतम कुमार भारती उड़ान के दौरान कुल्लू की एक पहाड़ी पर फंस गए हैं। सूचना मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को घटना से अवगत कराया गया और पायलट की स्थिति का पता लगाने के प्रयास शुरू किए गए। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और बर्फ की मौजूदगी को देखते हुए बचाव अभियान में सावधानी बरतना जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में दुर्घटना के सटीक कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उड़ान के दौरान पायलट को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिसके कारण वह पहाड़ी क्षेत्र में फंस गए।

रेडियो संपर्क और जीपीएस से मिली लोकेशन

इस घटना में बचाव दल के लिए सबसे महत्वपूर्ण जानकारी पायलट के साथ रेडियो संपर्क बना रहना है। रिपोर्ट के अनुसार, गौतम कुमार भारती ने अपने जीपीएस निर्देशांक प्रशासन के कंट्रोल रूम को भेजे हैं। बताए गए निर्देशांक 32°07′25″ उत्तरी अक्षांश और 76°58′05.6″ पूर्वी देशांतर हैं। इनकी मदद से पायलट के संभावित स्थान की पहचान करने में सहायता मिली है। ऊंचाई वाले इलाकों में मोबाइल नेटवर्क या सामान्य संचार व्यवस्था हमेशा उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में रेडियो संपर्क और जीपीएस निर्देशांक बचाव अभियान की दिशा तय करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। हालांकि, किसी स्थान की जानकारी मिल जाने के बावजूद वहां तक पहुंचना अलग चुनौती होती है। बर्फ से ढकी ढलानों, कम तापमान और कठिन भूभाग के कारण बचावकर्मियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

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हेलीकॉप्टर से बचाव की जरूरत क्यों?

पायलट जिस स्थान पर फंसे हैं, वहां भारी बर्फ और अधिक ऊंचाई के कारण जमीन के रास्ते पहुंचना चुनौतीपूर्ण बताया गया है। इसी वजह से उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकालने की आवश्यकता जताई गई है। हवाई बचाव अभियान में मौसम, हवा की गति, दृश्यता और हेलीकॉप्टर के सुरक्षित उतरने या निर्धारित स्थान के पास पहुंचने की संभावना महत्वपूर्ण होती है। पहाड़ी क्षेत्रों में इन परिस्थितियों का आकलन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में हेलीकॉप्टर से बचाव की कार्रवाई पूरी होने या पायलट को सुरक्षित निकाल लिए जाने की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए बचाव अभियान की मौजूदा स्थिति को लेकर आधिकारिक अपडेट का इंतजार है।

कुल्लू पुलिस और प्रशासन चला रहे बचाव अभियान

कुल्लू पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया है कि पायलट को सुरक्षित निकालने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। बचाव अभियान जारी है और संबंधित टीमें उनकी सुरक्षित वापसी के प्रयास कर रही हैं। इस घटना ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में साहसिक खेलों के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों की ओर ध्यान खींचा है। बीड़-बिलिंग पैराग्लाइडिंग के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन पहाड़ी मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों में बदलाव उड़ान को जोखिमपूर्ण बना सकते हैं। फिलहाल सबसे अहम प्राथमिकता पायलट तक सुरक्षित पहुंचना और उन्हें वहां से निकालना है। हादसे के कारणों और बचाव अभियान के अंतिम परिणाम के बारे में अधिक जानकारी संबंधित अधिकारियों की अगली सूचना के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

गौतम कुमार भारती कौन हैं?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौतम कुमार भारती, शिवजी राम के पुत्र हैं और मूल रूप से बिहार के दरभंगा जिले के खैरा कुंजी क्षेत्र के निवासी हैं। रिपोर्ट में उनका पिन कोड 847101 बताया गया है। घटना के समय वह पैराग्लाइडिंग कर रहे थे और उड़ान के दौरान कुल्लू की एक पहाड़ी पर फंस गए। उनके मित्र वरुण सिंह ने प्रशासन को इसकी जानकारी दी थी।

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