Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक करवा चौथ का पर्व आज पूरे उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखमय वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करते हुए दिनभर व्रत रखेंगी। सुबह से ही पर्व को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। बाजारों में खरीदारी, घरों में पूजा की तैयारियों और पारंपरिक श्रृंगार के बीच त्योहार का रंग दिखाई देने लगा है।
करवा चौथ भारतीय संस्कृति में विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। परंपरा के अनुसार महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद दिनभर अन्न और जल का त्याग करते हुए शाम को करवा माता की पूजा-अर्चना करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत के माध्यम से महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली की प्रार्थना करती हैं। करवा चौथ व्रत केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा आयोजन नहीं है, बल्कि यह दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास, समर्पण और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना को भी दर्शाता है। पर्व के दौरान परिवार के सदस्य भी उत्साह के साथ तैयारियों में भाग लेते हैं।
करवा चौथ को लेकर हमीरपुर के बाजारों में चहल-पहल बनी हुई है। महिलाएं मेहंदी लगवाने, रंग-बिरंगी चूड़ियां खरीदने, साड़ियां और आकर्षक परिधान चुनने के साथ ही श्रृंगार सामग्री की खरीदारी कर रही हैं। पूजा की थाली, करवा, दीपक, छलनी और अन्य पूजन सामग्री की भी मांग बनी हुई है। महिलाओं के लिए यह पर्व सजने-संवरने और परिवार के साथ खुशियां साझा करने का विशेष अवसर होता है। कई महिलाएं पारंपरिक परिधानों के साथ सोलह श्रृंगार की तैयारी कर रही हैं, वहीं घरों में पूजा स्थल को सजाने और शाम की रस्मों की व्यवस्था की जा रही है।
शाम के समय महिलाएं एकत्र होकर करवा माता की पूजा करेंगी और पारंपरिक कथा सुनेंगी। पूजा के दौरान परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में शांति की कामना की जाएगी। इसके बाद सभी को चंद्रोदय का इंतजार रहेगा। करवा चौथ पूजा विधि में चंद्रमा को अर्घ्य देना और उसके दर्शन करना महत्वपूर्ण माना जाता है। चांद निकलने पर महिलाएं छलनी से पहले चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद पूजा-अर्चना कर पति की आरती उतारती हैं और उनके हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोलती हैं। यह परंपरा पर्व के सबसे भावुक और प्रतीकात्मक क्षणों में से एक मानी जाती है।
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समय के साथ करवा चौथ मनाने के तरीकों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। आज कई परिवारों में पति भी अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने के लिए व्रत रखते हैं या पूरे दिन उनकी देखभाल और सहयोग करते हैं। इससे पर्व का स्वरूप आपसी साझेदारी, समान सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव से और अधिक मजबूत हो रहा है। हमीरपुर में भी महिलाएं इस पर्व को पारंपरिक रीति-रिवाजों और पारिवारिक उत्साह के साथ मनाने की तैयारी में हैं। अब सभी की निगाहें चंद्रमा के उदय पर टिकी रहेंगी, जिसके दर्शन के बाद सुहागिनें अपना व्रत पूरा करेंगी। करवा चौथ का संदेश यही है कि वैवाहिक जीवन की मजबूती प्रेम, विश्वास, संवाद और एक-दूसरे के प्रति सम्मान से आती है। यही भावना इस पर्व को हर वर्ष खास बनाती है।
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