हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला, अनुकंपा नियुक्ति से नियमित नौकरी का अधिकार नहीं
हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला, अनुकंपा नियुक्ति से नियमित नौकरी का अधिकार नहीं

Post by : Himachal Bureau

Oct. 27, 2026 11:46 a.m. 140

शिमला, 27 अक्टूबर 2026।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर मिलने वाली सरकारी नौकरियों को लेकर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति नियमित भर्ती का विकल्प नहीं है, बल्कि सरकारी कर्मचारी की मृत्यु या परिवार पर आए असाधारण संकट जैसी परिस्थितियों में आश्रितों को आर्थिक कठिनाइयों से उबारने के लिए दी जाने वाली सीमित राहत है। अदालत ने यह भी कहा कि अनुकंपा के आधार पर अनुबंध पर नियुक्त कर्मचारी को केवल इस आधार पर नियुक्ति को नियमित करवाने का स्वतः कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता।

जनक दुलारी की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

यह फैसला न्यायमूर्ति रंजन शर्मा ने जनक दुलारी की याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता ने विभाग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी नियुक्ति को नियमित करने की मांग स्वीकार नहीं की गई थी। अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

Read Also: धर्मशाला में 15 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, किराए के कमरे में मिला शव

पति के लापता होने के बाद मिली थी नौकरी

मामले के अनुसार, जनक दुलारी के पति राम स्वरूप श्रीमाली पुलिस विभाग में सेवाकाल के दौरान लापता हो गए थे। इसके बाद उनका सेवाकाल समाप्त मान लिया गया था। परिवार के सामने पैदा हुए वित्तीय संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने 23 जून 2007 को जनक दुलारी को पुलिस महानिदेशक कार्यालय, शिमला में अनुकंपा के आधार पर अनुबंध पर क्लर्क नियुक्त किया था।

2013 में अदालत पहुंची थीं याचिकाकर्ता

जनक दुलारी ने वर्ष 2013 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विभाग के वर्ष 2012 के आदेश को चुनौती दी थी। उन्होंने मांग की थी कि उनकी नियुक्ति को वर्ष 2007 से ही नियमित माना जाए। उनकी दलील थी कि विभाग में अन्य आश्रितों को नियमित पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं, इसलिए उनके मामले में भी समान व्यवहार किया जाना चाहिए।

अनुकंपा नियुक्ति और नियमित भर्ती में अंतर

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य संकटग्रस्त परिवार को तत्काल राहत देना है। इसे नियमित भर्ती प्रक्रिया का विकल्प नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार, नियुक्ति स्वीकार करने के बाद कर्मचारी को सेवा संबंधी नियमों के तहत अपने करियर में आगे बढ़ना होता है। केवल अनुकंपा नियुक्ति मिलने से अनुबंध की शर्तों को बदलकर नियुक्ति को नियमित कराने का अधिकार पैदा नहीं होता।

फैसले का क्या है मतलब?

यह फैसला अनुकंपा नियुक्तियों और नियमित सरकारी भर्ती के बीच अंतर को स्पष्ट करता है। हालांकि, किसी भी मामले में नियुक्ति की शर्तें, लागू सरकारी नीतियां और संबंधित तथ्यों का महत्व बना रहता है। इस मामले में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की नियमित नियुक्ति की मांग को स्वीकार नहीं किया।

#शिमला #हिमाचल प्रदेश #ब्रेकिंग न्यूज़ #ताज़ा खबरें
अनुच्छेद
प्रायोजित
ट्रेंडिंग खबरें
राजेश धर्माणी ने युवाओं से इनोवेशन और रिसर्च पर ध्यान देने की अपील की शाहपुर में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कृष्ण लीलाओं ने मोहा मन अनुराग ठाकुर का जन्मदिन: समीरपुर से संसद और बीसीसीआई तक का सफर पालमपुर में स्कूली छात्रों को पोषण और आधुनिक खेती का प्रशिक्षण मिलेगा सिरमौर के 8 खिलाड़ी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में दिखाएंगे दमखम हिमाचल की नन्ही कलाकार आशवी को राष्ट्रीय सम्मान, प्रदेश का नाम रोशन सिरमौर में 24 वर्षीय प्रधान का फैसला, शादी में फिजूलखर्ची पर 51 हजार जुर्माना मोनिका ठाकुर ने CSIR NET JRF में हासिल की ऑल इंडिया 65वीं रैंक, सराज का नाम किया रोशन