Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हमीरपुर। मेहनत, आत्मविश्वास और मजबूत इरादों के सामने बड़ी से बड़ी चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर की बेटी वैष्वी शर्मा ने अपनी शानदार शैक्षणिक उपलब्धि से इस बात को सच साबित कर दिखाया है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए उन्होंने देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान एम्स पटना में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए जगह बनाई है। वैष्वी ने परीक्षा में 653 अंक हासिल किए और अखिल भारतीय स्तर पर 1239वीं रैंक प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने हिमाचल प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल कर अपने परिवार, गृह जिले और पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है।
वैष्वी की सफलता के पीछे उनकी मां मोनिका गौतम का वर्षों का संघर्ष और समर्पण छिपा है। लगभग 15 वर्ष पहले पिता स्वर्गीय सज्जन कुमार के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां ने संभाली। कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। मोनिका गौतम ने हर मुश्किल का सामना करते हुए वैष्वी को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। मां के इसी विश्वास और बेटी की लगातार मेहनत का परिणाम है कि आज वैष्वी ने देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में प्रवेश पाने का सपना पूरा किया है।
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वैष्वी शर्मा की शुरुआती पढ़ाई और बारहवीं तक की शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, हमीरपुर में हुई। वह बचपन से ही पढ़ाई में अच्छी रही हैं। उनकी मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा में हिमाचल प्रदेश के जवाहर नवोदय विद्यालयों के बीच शीर्ष स्थान हासिल किया था। इस उपलब्धि के बाद उनका चयन पुणे स्थित प्रतिष्ठित दक्षणा फाउंडेशन के एक वर्षीय आवासीय छात्रवृत्ति कार्यक्रम के लिए हुआ। यहां उन्हें चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने का अवसर मिला।
दक्षणा फाउंडेशन में रहकर वैष्वी ने पूरे अनुशासन और एकाग्रता के साथ राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा की तैयारी की। परिवार से दूर रहकर उन्होंने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई और निर्धारित लक्ष्य पर केंद्रित रखा। इस कठिन तैयारी के बाद उन्होंने परीक्षा में 653 अंक प्राप्त किए और अखिल भारतीय स्तर पर 1239वीं रैंक हासिल की। इसी शानदार प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन एम्स पटना में एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए हुआ।
वैष्वी की इस उपलब्धि से उनके परिवार, रिश्तेदारों, शिक्षकों और हमीरपुर क्षेत्र में खुशी की लहर है। उनकी कहानी उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित सुविधाओं के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। अब एम्स पटना में चिकित्सा की पढ़ाई शुरू करके वैष्वी अपने डॉक्टर बनने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ेंगी। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां किसी की मंजिल तय नहीं करतीं, बल्कि मेहनत, धैर्य और परिवार का साथ सफलता का रास्ता तैयार करते हैं।
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