सुख-आश्रय योजना के सहारे करनदीप ने शुरू किया ‘रॉयल लुक’ सैलून, अब कमा रहे 35 हजार रुपये तक
सुख-आश्रय योजना के सहारे करनदीप ने शुरू किया ‘रॉयल लुक’ सैलून, अब कमा रहे 35 हजार रुपये तक

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Sept. 22, 2026 12:26 p.m. 108

ऊना जिले के हरोली क्षेत्र के रोड़ा गांव निवासी 24 वर्षीय करनदीप ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी मेहनत और हुनर के दम पर आत्मनिर्भर बनने की राह बनाई है। बचपन में माता-पिता को खोने के बाद जीवन में आई चुनौतियों के बीच मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना से मिले आर्थिक सहयोग ने उन्हें अपना कारोबार शुरू करने का अवसर दिया। आज ऊना के रामपुर में उनका ‘रॉयल लुक’ हेयर सैलून चल रहा है, जिससे उन्हें हर महीने करीब 30 से 35 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।

बचपन में ही उठ गया माता-पिता का साया

करनदीप तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। जब वह महज तीन महीने के थे, तब उनकी मां का निधन हो गया। इसके बाद पांचवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान उनके पिता भी चल बसे। उनके पिता लुधियाना में हलवाई का काम करते थे। माता-पिता के निधन के बाद उनकी बड़ी बहनों ने सिलाई-कढ़ाई का काम करके करनदीप की परवरिश की। कठिन पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने आगे बढ़ने और अपने पैरों पर खड़े होने का प्रयास जारी रखा।

गुरुग्राम में सीखा सैलून का काम

12वीं कक्षा पूरी करने के बाद करनदीप ने हेयर सैलून का काम सीखना शुरू किया। वर्ष 2019-20 के दौरान उन्होंने करीब दो साल तक गुरुग्राम में रहकर इस काम का अनुभव हासिल किया। इसके बाद वर्ष 2021 से 2024 तक ऊना और वर्ष 2024-25 में हरोली में काम करते हुए उन्होंने अपने हुनर को और बेहतर किया। इसी दौरान उन्होंने अपना कारोबार शुरू करने की योजना बनाई। कई वर्षों तक काम सीखने और अनुभव हासिल करने के बाद उन्हें अपना सैलून खोलने का अवसर मिला।

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सुख-आश्रय योजना से मिली दो लाख रुपये की मदद

करनदीप को मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना की जानकारी आईसीडीएस विभाग के माध्यम से मिली। वर्ष 2025 में उन्हें योजना के तहत हर महीने चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलनी शुरू हुई। इसके बाद वर्ष 2026 में स्वरोजगार शुरू करने के लिए उन्हें योजना के तहत दो लाख रुपये की सहायता मिली। इस आर्थिक सहयोग से उनके लंबे समय से देखे जा रहे अपना कारोबार शुरू करने के सपने को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला। फरवरी 2026 में उन्होंने ऊना के रामपुर में किराये की दुकान लेकर ‘रॉयल लुक’ नाम से अपना हेयर सैलून शुरू किया।

सैलून से हर महीने 30 से 35 हजार रुपये की आमदनी

करनदीप ने सैलून शुरू करने के लिए मिली दो लाख रुपये की सहायता में से करीब 1.40 लाख रुपये जरूरी सामान खरीदने पर खर्च किए। बाकी 60 हजार रुपये से दुकान की अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी की गईं। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन वर्षों के अनुभव और लगातार मेहनत के कारण कारोबार धीरे-धीरे आगे बढ़ा। करनदीप के अनुसार, वर्तमान में उन्हें सैलून से हर महीने करीब 30 से 35 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।

अब चार युवाओं को सिखा रहे सैलून का काम

करनदीप की सफलता की खास बात यह भी है कि उन्होंने अपने हुनर को केवल अपने तक सीमित नहीं रखा। वर्तमान में वे चार युवाओं को हेयर सैलून का काम सिखा रहे हैं। प्रशिक्षण लेने वाले इन युवाओं को वह करीब दो-दो हजार रुपये प्रतिमाह भी दे रहे हैं। इससे पहले एक युवक उनके यहां काम सीखने के बाद रोजगार के लिए दुबई जा चुका है। करनदीप अब अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के साथ अधिक युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ना चाहते हैं।

कारोबार को बड़ा बनाने की तैयारी

करनदीप की दोनों बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। अब उनका पूरा ध्यान अपने कारोबार को आगे बढ़ाने पर है। वह रामपुर में शुरू किए गए छोटे से सैलून को भविष्य में बड़ा करना चाहते हैं, ताकि कारोबार के विस्तार के साथ दूसरे युवाओं को भी प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिल सकें। करनदीप ने अपने जीवन में आए बदलाव का श्रेय अपनी मेहनत के साथ मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना से मिले सहयोग को दिया है। उनका कहना है कि योजना से मिली सहायता ने उन्हें अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने का अवसर दिया।

पात्र बच्चों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना विशेष देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों तथा युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। योजना के तहत पात्र बच्चों और युवाओं को आर्थिक सहायता के साथ स्वरोजगार शुरू करने के लिए भी सहयोग उपलब्ध करवाया जाता है। हिमाचल प्रदेश सरकार के अनुसार, राज्य देश का पहला राज्य है जिसने अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का कानूनी दर्जा देकर उनके संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली है। उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार योजना का लाभ प्रत्येक पात्र बच्चे तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन कार्य कर रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि कोई भी पात्र बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे।

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