Post by : Khushi Joshi
हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल आईजीएमसी शिमला में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक फर्जी महिला लैब टेक्नीशियन को मरीजों के खून के सैंपल लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। यह मामला सामने आते ही अस्पताल प्रशासन और मरीजों के परिजनों में चिंता का माहौल बन गया। बताया जा रहा है कि यह महिला पिछले कुछ दिनों से वार्डों और इमरजेंसी एरिया में घूम रही थी और खुद को अस्पताल की कर्मचारी बताकर मरीजों से खून के सैंपल ले रही थी।
अस्पताल प्रशासन को काफी समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ बाहरी लोग मरीजों और उनके परिजनों को गुमराह कर रहे हैं और अस्पताल के अंदर ही अवैध रूप से जांच के नाम पर खून के सैंपल एकत्र कर रहे हैं। सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी अस्पताल में मरीजों के सैंपल लेने का काम केवल अधिकृत स्टाफ ही कर सकता है, लेकिन इसके बावजूद यह महिला बिना किसी पहचान पत्र या वैध अनुमति के खुलेआम अपना काम कर रही थी।
गुरुवार को जब उसे दोबारा अस्पताल परिसर में देखा गया, तो प्रशासन पहले से सतर्क था और उसे पकड़ने के लिए योजना बनाई गई थी। अस्पताल के एक वरिष्ठ कर्मचारी ने मरीज बनकर उससे संपर्क किया और जब महिला वहां पहुंची, तो उससे पहचान पत्र और प्रमाणिक दस्तावेज दिखाने के लिए कहा गया। महिला कोई भी वैध पहचान या नियुक्ति पत्र नहीं दिखा सकी। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों और अस्पताल प्रशासन ने उसे तुरंत काबू कर लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।
प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया है कि महिला किसी निजी लैब से जुड़ी हो सकती है और मरीजों के सैंपल अवैध रूप से ले जाकर उन्हें बाहर भेजे जा रहे थे। हालांकि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है, इसकी जांच पुलिस और प्रशासन द्वारा की जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने भी अपने स्तर पर आंतरिक जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि महिला को अस्पताल परिसर में इतनी आसानी से कैसे प्रवेश मिल रहा था।
आईजीएमसी प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि मरीजों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। अस्पताल में अब प्रवेश द्वारों पर अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी गई है और सभी स्वास्थ्यकर्मियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि बिना पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति को मरीजों के पास जाने की अनुमति न दी जाए। साथ ही मरीजों और उनके परिजनों से भी अपील की गई है कि अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति खुद को डॉक्टर, नर्स या लैब टेक्नीशियन बताकर सैंपल लेने आए तो उससे पहले पहचान पत्र जरूर मांगें और तुरंत अस्पताल प्रशासन को इसकी सूचना दें।
यह मामला सिर्फ एक महिला का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर किसी बाहरी व्यक्ति की इंट्री कितनी खतरनाक हो सकती है। मरीज पहले ही बीमारी से परेशान होता है और ऐसे में अगर कोई उनकी मजबूरी का फायदा उठाने लगे, तो यह बेहद गंभीर विषय बन जाता है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की कोई भी घटना दोबारा न हो सके।
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