बांस की शिल्पकला में साकार हो रही देश की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरे
बांस की शिल्पकला में साकार हो रही देश की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरे

Author : Rajesh Vyas

Oct. 1, 2026 1:16 p.m. 201

पंचरुखी, 1 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश के तहसील मुख्यालय पंचरुखी से सटे गांव लदोह के रहने वाले शिल्पकार विनय कुमार अवस्थी ने बांस जैसी साधारण प्राकृतिक सामग्री को अपनी कल्पनाशीलता और सूक्ष्म शिल्प कौशल से ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों का रूप दे दिया है। उनके हाथों से तैयार कलाकृतियों को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि इतनी बारीक और आकर्षक आकृतियां बांस से बनाई गई हैं। विनय कुमार अवस्थी की कलाकृतियां इन दिनों ‘हुनर हाट’ में लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। यहां एक ही छत के नीचे हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों की प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रतिरूप देखने को मिल रहे हैं। मंदिरों से लेकर ताजमहल और एफिल टावर तक, उनकी कलाकृतियां इतिहास, आस्था और संस्कृति की अलग-अलग तस्वीर पेश करती हैं।

पारंपरिक विरासत से नहीं मिली शिल्पकला

सबसे खास बात यह है कि विनय कुमार अवस्थी को यह शिल्पकला किसी पारंपरिक पारिवारिक विरासत के रूप में नहीं मिली। उन्होंने स्वयं इस कला को सीखा और धीरे-धीरे इसमें अपनी अलग पहचान बनाई। 1964 में जन्मे विनय कुमार अवस्थी एक सामान्य कृषक परिवार से संबंध रखते हैं। उन्होंने अपने युवा जीवन का एक हिस्सा भारतीय सेना की शिक्षा कोर में सेवा देते हुए बिताया। सेना से जुड़ी सेवा के बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में शास्त्री शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2022 में सेवानिवृत्त होने के बाद उनके भीतर शिल्पकला के प्रति रुचि और गहरी हुई। धीरे-धीरे यह रुचि उनके लिए नियमित साधना में बदल गई। उन्होंने बांस और अन्य सामग्री के साथ प्रयोग शुरू किए और समय के साथ विभिन्न ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संरचनाओं के प्रतिरूप तैयार करने लगे।

देश-विदेश की धरोहरों के बांस से बनाए प्रतिरूप

विनय कुमार अवस्थी की कलाकृतियों में हिमाचल प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ देश के अन्य प्रसिद्ध स्थलों की झलक भी दिखाई देती है। उनके हुनर हाट में प्रदर्शित प्रमुख धार्मिक धरोहरों में रेणुका देवी मंदिर नाहन, हिडिंबा माता मंदिर मनाली, श्रीराम मंदिर अयोध्या, केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड, शिव मंदिर बैजनाथ, पंचवक्त्र मंदिर मंडी, आशापुरी मंदिर जयसिंहपुर, भीमाकाली मंदिर शिमला, चौरासी मंदिर भरमौर और लक्ष्मी नारायण मंदिर चंबा शामिल हैं। इसके अलावा पराशर ऋषि मंदिर मंडी, स्वर्ण मंदिर अमृतसर, महाकाल मंदिर बैजनाथ, चामुंडा नंदिकेश्वर धाम कांगड़ा, बिजली महादेव मंदिर कुल्लू और किन्नौर की काष्ठकुणी शैली के मंदिर भी उनकी शिल्पकृतियों में शामिल हैं। इन प्रतिरूपों में बांस की बारीक पट्टियों और हिस्सों का इस्तेमाल करते हुए वास्तुकला की विशेषताओं को उकेरने का प्रयास किया गया है।

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ताजमहल से एफिल टावर तक दिखती है विविधता

विनय कुमार अवस्थी की कला केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है। उनके संग्रह में देश-विदेश की प्रसिद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान रखने वाली कई अन्य संरचनाओं के प्रतिरूप भी हैं।हुनर हाट में रिज चर्च शिमला, ताजमहल आगरा और एफिल टावर फ्रांस की कलाकृतियां भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। इसके अलावा उन्होंने स्टीम रेल इंजन, छोटी और बड़ी सेलिंग बोट, प्राचीन शैली के हिमाचली घर, दो मंजिला हिमाचली मकान, पुरातन आटा चक्की यानी घराट, हिंडोला, ट्री हाउस तथा दूल्हे और दुल्हन की पालकी के प्रतिरूप भी तैयार किए हैं। इन कलाकृतियों के माध्यम से हिमाचली ग्रामीण जीवन, पुरानी वास्तुकला और पारंपरिक परिवहन साधनों की झलक भी देखने को मिलती है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

समय के साथ विनय कुमार अवस्थी की कलाकृतियों की संख्या बढ़ती गई और उन्हें देखने के लिए लोगों की रुचि भी बढ़ी। विभिन्न आयोजकों और संस्थाओं की ओर से उन्हें अपनी कलाकृतियां प्रदर्शनियों में प्रदर्शित करने के लिए आमंत्रित किया जाने लगा। उनकी बोतल आर्ट और बांस से तैयार शिल्पकृतियां देश-विदेश की कई गणमान्य हस्तियों के कार्यालयों और निजी संग्रहों तक पहुंच चुकी हैं। उनकी कला को विभिन्न आयोजनों में प्रदर्शित होने का अवसर भी मिला है। उनकी शिल्प-साधना को एशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी स्थान मिलने की जानकारी दी गई है। इससे उनकी कला को व्यापक पहचान मिली है।

बांस में दिखाई देती है इतिहास और संस्कृति की झलक

विनय कुमार अवस्थी की शिल्पकला की खासियत केवल इसकी खूबसूरती नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी कल्पना और मेहनत भी है। उन्होंने बांस जैसी सामान्य और प्राकृतिक सामग्री को धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और पारंपरिक जीवनशैली के प्रतीकों में बदलने का प्रयास किया है। उनका ‘हुनर हाट’ एक सामान्य प्रदर्शनी से अलग नजर आता है। यहां आने वाले लोगों को एक ही स्थान पर हिमाचल के मंदिरों, देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक इमारतों और पारंपरिक जीवन से जुड़ी वस्तुओं के प्रतिरूप देखने को मिलते हैं। विनय कुमार अवस्थी की यह शिल्पयात्रा यह भी बताती है कि रचनात्मकता के लिए किसी बड़ी कार्यशाला या महंगी सामग्री की आवश्यकता हमेशा नहीं होती। कल्पना, धैर्य और लगातार अभ्यास के सहारे बांस जैसी साधारण सामग्री से भी इतिहास और संस्कृति की कहानी को आकार दिया जा सकता है।

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