पालमपुर में राज्यपाल ने कौशल आधारित शिक्षा पर दिया जोर, युवाओं को रोजगार प्रदाता बनाने पर बल
पालमपुर में राज्यपाल ने कौशल आधारित शिक्षा पर दिया जोर, युवाओं को रोजगार प्रदाता बनाने पर बल

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Sept. 23, 2026 5:24 p.m. 110

कांगड़ा के पालमपुर में श्री साईं विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने युवाओं की शिक्षा और रोजगार क्षमता को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि बदलते समय में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। विश्वविद्यालयों को ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिसमें विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ कौशल, आत्मविश्वास, रोजगार क्षमता और उद्यमिता के अवसर मिल सकें।

विश्वविद्यालय ज्ञान के साथ कौशल और नवाचार पर करें काम

राज्यपाल ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान केवल उसकी डिग्रियों से नहीं, बल्कि ज्ञान, मूल्यों, अनुसंधान, नवाचार और समाज के प्रति उसके योगदान से होती है। उन्होंने वर्ष 1996 में बधानी से शुरू हुई श्री साईं ग्रुप की शैक्षणिक यात्रा को शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां अन्य राज्यों से अलग हैं। प्रदेश के कई क्षेत्र पहाड़ी और दुर्गम हैं। ऐसे क्षेत्रों में उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही शिक्षा और विकास के नए अवसर मिल सकते हैं।

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युवाओं को नौकरी लेने के साथ रोजगार देने के लिए तैयार करें

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों को उद्योग जगत के साथ अपने संबंध मजबूत करने की जरूरत है। युवाओं की ऊर्जा और क्षमता को सही दिशा देने के लिए शिक्षा को व्यावहारिक जरूरतों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उनका लक्ष्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। उन्हें रोजगार देने वाले उद्यमी और ऐसे नवप्रवर्तक बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, जो नई समस्याओं के समाधान खोज सकें और नए विचारों को वास्तविकता में बदल सकें।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का किया उल्लेख

कविन्द्र गुप्ता ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा को अधिक समग्र, लचीला और बहुविषयक बनाने पर जोर दिया गया है। उन्होंने समानता, गुणवत्ता और जवाबदेही को शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास, स्टार्टअप और उद्यमिता के माध्यम से विश्वविद्यालय राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विश्वविद्यालयों को युवाओं में इन क्षेत्रों से जुड़ी क्षमता विकसित करने के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध करवाना चाहिए।

पर्वतीय शिक्षा और साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की अपील

राज्यपाल ने श्री साईं विश्वविद्यालय की पर्वतीय एवं पर्वतारोहण गतिविधियों से संबंधित शिक्षा की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों को पर्यटन, साहसिक खेल, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन, खेल विज्ञान और स्थानीय रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय से शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और व्यावहारिक अनुभव को एक साथ जोड़कर ऐसा मॉडल विकसित करने का आह्वान किया, जिससे प्रदेश के युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिल सकें।

विद्यार्थियों से अनुशासन और ईमानदारी अपनाने की अपील

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी पूंजी हैं और उन्हें उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षकों का सम्मान करने, लगातार सीखते रहने और तकनीक के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि असफलता को अंत नहीं मानना चाहिए, बल्कि उससे सीखकर खुद को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए। राज्यपाल ने विद्यार्थियों को अनुशासन, कड़ी मेहनत और ईमानदारी को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी। इससे पहले श्री साईं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एस.के. पुंज ने राज्यपाल का स्वागत किया और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा तथा उपलब्धियों की जानकारी दी। समारोह में उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा, कुलपति प्रोफेसर वी.पी. पटियाल, प्रबंध निदेशक तृप्ता पुंज, प्रति-कुलपति तुषार पुंज, उपाध्यक्ष रिया पुंज सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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