Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
ऊना जिले के बंगाणा क्षेत्र में पुलिस की तत्परता और जिम्मेदारी की एक मिसाल सामने आई है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अनजाने में छूटा एक लैपटॉप करीब छह घंटे तक उसी स्थान पर सुरक्षित पड़ा रहा। सूचना मिलने के बाद हिमाचल पुलिस के जवानों ने करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद लैपटॉप को खोज निकाला और उसे सुरक्षित उसके मालिक तक पहुंचाने में मदद की।
जानकारी के अनुसार, 17 सितंबर 2026 को एक व्यक्ति कार्यालय संबंधी काम के सिलसिले में ऊना गया था। वापस लौटते समय वह बंगाणा से ऊना की ओर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे एक बंद खोखे के पास रुका। वहां उसने अपने सहयोगी के साथ टेबलनुमा स्थान पर बैठकर लैपटॉप की मदद से जरूरी डाटा तैयार किया और मीटिंग से जुड़ा काम पूरा किया। काम खत्म करने के बाद दोनों वहां से रवाना हो गए। कुछ समय बाद जब लैपटॉप के मालिक ने अपना बैग देखा तो उसमें लैपटॉप नहीं था। उन्होंने अपने सहयोगी से फोन पर जानकारी ली, लेकिन लैपटॉप उसके पास भी नहीं था। इसके बाद उन्हें अंदेशा हुआ कि लैपटॉप शायद उसी जगह छूट गया है।
लैपटॉप के मालिक ने अपने चचेरे भाई और साइबर ब्रांच मंडी में तैनात हेड कांस्टेबल अनिल शर्मा से संपर्क किया। अनिल शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शाम करीब सात बजे अपने सहकर्मियों से संपर्क किया और लैपटॉप की तलाश शुरू करवाई। तलाश के दौरान सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि लैपटॉप जहां छूटा था, उस जगह की सटीक लोकेशन या नाम किसी को पता नहीं था। केवल इतना याद था कि वह स्थान बंगाणा से ऊना की तरफ राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब दो से तीन किलोमीटर पीछे है। आसपास पेयजल विभाग के किसी अधिकारी का आवास भी बताया गया था, जिस पर अधिशासी अभियंता लिखा हुआ था।
जानकारी के आधार पर बंगाणा थाना में तैनात पुलिस जवान जसवीर सिंह और यशपाल बग्गा ने संभावित स्थानों की तलाश शुरू की। दोनों पुलिसकर्मियों ने वीडियो कॉल के माध्यम से लगातार लैपटॉप के मालिक से लोकेशन से जुड़ी जानकारी ली और सड़क किनारे मौजूद संभावित जगहों को एक-एक करके जांचना शुरू किया। करीब डेढ़ घंटे की लगातार मेहनत के बाद रात करीब साढ़े नौ बजे पुलिसकर्मियों को आखिरकार वह जगह मिल गई, जहां लैपटॉप छोड़ा गया था।
पुलिस को लैपटॉप उसी स्थान पर सुरक्षित रखा हुआ मिला। बाद में पता चला कि लैपटॉप बंगाणा से करीब सात से आठ किलोमीटर पीछे ऊना की ओर थाना कलां क्षेत्र में छूटा था। खास बात यह रही कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार वाहनों की आवाजाही के बावजूद करीब छह घंटे तक लैपटॉप उसी जगह सुरक्षित पड़ा रहा। किसी व्यक्ति ने उसे उठाया नहीं और न ही उसे किसी तरह का नुकसान हुआ।
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लैपटॉप सुरक्षित मिलने के बाद उसके मालिक ने हिमाचल पुलिस के जवानों का आभार जताया। उन्होंने हेड कांस्टेबल अनिल शर्मा, जसवीर सिंह और यशपाल बग्गा की विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों ने जिस तत्परता और जिम्मेदारी के साथ उनकी मदद की, वह काबिल-ए-तारीफ है। लैपटॉप में महत्वपूर्ण कार्यालय संबंधी डाटा होने के कारण उसके खोने से मालिक काफी चिंतित थे। ऐसे में पुलिस की कोशिश से लैपटॉप सुरक्षित मिलना उनके लिए बड़ी राहत रही। यह घटना पुलिस की जिम्मेदारी, तत्परता और आम लोगों की मदद के प्रति संवेदनशीलता का उदाहरण सामने लाती है। ऐसी घटनाएं पुलिस और समाज के बीच भरोसे को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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