नौणी विश्वविद्यालय में छात्र की पानी के टैंक में डूबने से दर्दनाक मौत
नौणी विश्वविद्यालय में छात्र की पानी के टैंक में डूबने से दर्दनाक मौत

Post by : Himachal Bureau

May 2, 2026 4:58 p.m. 1369

हिमाचल प्रदेश के डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां बीएससी ऑनर्स (बागवानी) अंतिम वर्ष के एक छात्र की परिसर में स्थित पानी के टैंक में गिरने से मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे विश्वविद्यालय परिसर में शोक की लहर दौड़ गई है और छात्रों व शिक्षकों में गहरा आक्रोश व दुख देखा जा रहा है।

मृतक छात्र की पहचान मंजीत जायसवाल के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले का रहने वाला था। मंजीत का चयन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कोटे के तहत राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में हुआ था। वह अपनी पढ़ाई में मेहनती और होनहार छात्र के रूप में जाना जाता था।

घटना के समय विश्वविद्यालय में खेल प्रतियोगिता (स्पोर्ट्स मीट) चल रही थी और अधिकांश छात्र व शिक्षक खेल मैदान में मौजूद थे। बताया जा रहा है कि मंजीत हॉस्टल से टहलते हुए डेयरी सेक्शन के पास स्थित पानी के टैंक की ओर गया। यह टैंक काफी ऊंचा था और उसके ऊपर कोई सुरक्षा घेरा नहीं लगा हुआ था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छात्र अचानक टैंक के ऊपर चढ़ गया, लेकिन उसका पैर फिसल गया और वह करीब 12 फीट गहरे पानी के टैंक में गिर गया। पास मौजूद एक अन्य छात्र ने उसे गिरते हुए देख शोर मचाया, लेकिन उस समय मौके पर मोबाइल फोन की उपलब्धता नहीं होने और टैंक की गहराई अधिक होने के कारण तुरंत बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका। जब तक उसे बाहर निकाला गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

इस दर्दनाक घटना ने विश्वविद्यालय प्रशासन की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है। यह पानी का टैंक वर्ष 2007 में बनाया गया था, लेकिन पिछले 17 वर्षों से यह बिना किसी सुरक्षा कवर के खुला पड़ा हुआ था। न तो इसके चारों ओर कोई फेंसिंग थी और न ही सुरक्षा के लिए सीढ़ियां या बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई और क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। यह हादसा न केवल एक होनहार छात्र की असमय मौत का कारण बना है, बल्कि विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े कर गया है।

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