Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या को रोकने के लिए राज्य स्तर पर एक बड़े जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई है। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि यदि बच्चों को बचपन से ही नशे के दुष्प्रभावों के बारे में सही जानकारी दी जाए, तो उन्हें भविष्य में इस बुरी लत से बचाया जा सकता है। उन्होंने समाज के हर वर्ग से अपील की कि युवाओं के सुरक्षित भविष्य के लिए नशे के खिलाफ एकजुट होकर अभियान चलाया जाए।
राज्यपाल ने यह बातें राजभवन स्थित लोक भवन में अनुव्रत विश्व भारती सोसायटी द्वारा आयोजित ‘एलीवेट-एक्सपीरियंस द रियल हाई, ए स्टेप टुवर्ड्स ड्रग-फ्री हिमाचल’ अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में कहीं। इसी कार्यक्रम के साथ हिमाचल प्रदेश में राज्यव्यापी नशा जागरूकता अभियान की भी शुरुआत हुई, जिसे आने वाले समय में प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचाया जाएगा।
बच्चों को बचपन से देना होगा सही मार्गदर्शन
राज्यपाल ने कहा कि नशे की समस्या केवल कानून से खत्म नहीं होगी। इसके लिए बच्चों को छोटी उम्र से ही सही संस्कार, अच्छी शिक्षा और नशे के नुकसान की जानकारी देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार और स्कूल मिलकर बच्चों को सही दिशा देंगे, तो वे गलत संगत और नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों में अच्छे विचार और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यही प्रयास भविष्य में एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज बनाने में मदद करेगा।
'एलीवेट' अभियान से युवाओं को मिलेगा नया संदेश
राज्यपाल ने कहा कि 'एलीवेट' अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को सकारात्मक जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करने वाला जनआंदोलन है। उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को यह समझाना है कि असली सफलता नशे में नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और अच्छे जीवन मूल्यों में छिपी है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि इस अभियान को गांव-गांव, स्कूलों और कॉलेजों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया गया, तो हिमाचल प्रदेश नशा मुक्त राज्य बनने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है।
परिवार, शिक्षक और समाज की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
राज्यपाल ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं और उन्हें नशे से बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें माता-पिता, शिक्षक, समाज और प्रशासन सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि यदि शिक्षक समय-समय पर विद्यार्थियों से बातचीत करें, उनकी समस्याओं को समझें और सही सलाह दें, तो कई बच्चों को नशे की ओर बढ़ने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि अच्छे संस्कार और जीवन मूल्यों की शिक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
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विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के युवाओं का स्वस्थ, शिक्षित और नशा मुक्त होना बेहद जरूरी है। यदि युवा अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाएंगे, तो देश तेजी से विकास करेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं की प्रतिभा और मेहनत ही देश की सबसे बड़ी पूंजी है। इसलिए उन्हें नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाना समय की जरूरत है।
देवभूमि हिमाचल भी नशे की चुनौती से अछूता नहीं
राज्यपाल ने चिंता जताते हुए कहा कि देवभूमि कहलाने वाला हिमाचल प्रदेश भी अब नशे की बढ़ती समस्या से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। ऐसे में सभी लोगों को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश का युवा नशे से दूर रहेगा तो हिमाचल अधिक मजबूत, स्वस्थ और समृद्ध बनेगा।
इस अवसर पर नशा उन्मूलन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया। साथ ही नशा जागरूकता पर आधारित एक विशेष पुस्तिका का विमोचन किया गया, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सही जानकारी पहुंच सके।
मोबाइल की लत पर भी जताई चिंता
कार्यक्रम में एनआईटी जालंधर के निदेशक और एनआईटी श्रीनगर के अतिरिक्त निदेशक प्रोफेसर विनोद कुमार कनोजिया ने युवाओं में मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल नशे से ही नहीं, बल्कि मोबाइल की लत से भी बच्चों और युवाओं को बचाना जरूरी है। इसके लिए परिवार और शिक्षकों को समय-समय पर बच्चों से संवाद करना चाहिए और उन्हें संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
देशभर से पहुंचे लोगों ने लिया नशा मुक्त समाज का संकल्प
कार्यक्रम में देश के कई राज्यों से आए शिक्षाविदों, समाजसेवियों, प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया। सभी ने नशा मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया और इस अभियान को हर जिले, हर गांव और हर स्कूल तक पहुंचाने का संदेश दिया।
राज्यपाल ने अंत में कहा कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई केवल सरकार की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यदि परिवार, शिक्षक, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर लगातार प्रयास करें, तो आने वाली पीढ़ी को नशे जैसी बुराई से बचाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से हिमाचल प्रदेश को नशा मुक्त बनाने का सपना जरूर पूरा होगा।
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