हिमाचल में शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा, राजेश धर्माणी ने रखी बड़ी योजना
हिमाचल में शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा, राजेश धर्माणी ने रखी बड़ी योजना

Author : Rajesh Vyas

June 29, 2026 12:42 p.m. 115

हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा, आवास एवं नगर नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा है कि राज्य के संतुलित, सुरक्षित और टिकाऊ विकास के लिए प्रभावी शहरी नियोजन समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि अलग-अलग राज्यों के सफल अनुभवों से सीखकर योजनाएं बनाई जाएं, तो स्थानीय जरूरतों के अनुसार बेहतर विकास मॉडल तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने यह बात धर्मशाला में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी के दौरान कही।

धर्मशाला में क्यों आयोजित हुई यह संगोष्ठी?

धर्मशाला के रैडिसन ब्लू रिजॉर्ट में टाउन प्लानर्स इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (आईटीपीआई) नॉर्दर्न चैप्टर की ओर से "नीतिगत ढांचा और योजना प्रथाएं" विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में अपनाई जा रही बेहतर शहरी नियोजन प्रणालियों का अध्ययन करना और दोनों राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान करना था। कार्यक्रम में दोनों राज्यों के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने अपनी योजनाओं और कार्यान्वयन से जुड़े अनुभव साझा किए।

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हरियाणा से हिमाचल क्या सीखेगा?

राजेश धर्माणी ने कहा कि हरियाणा द्वारा अपनाई गई ई-गवर्नेंस प्रणाली, आधुनिक नियोजन प्रक्रिया और प्रशासनिक मॉडल से हिमाचल प्रदेश को नई जानकारियां मिली हैं। इन व्यवस्थाओं का अध्ययन कर प्रदेश की भौगोलिक, पर्यावरणीय और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जरूरी बदलावों के साथ इन्हें अपनाने पर विचार किया जाएगा। उनका मानना है कि इस तरह के सहयोग से बेहतर और व्यवहारिक विकास योजनाएं तैयार की जा सकती हैं।

सरकार का शहरी विकास को लेकर क्या लक्ष्य है?

मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार पर्यटन, आधारभूत ढांचे और शहरी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और आपदा जोखिम को कम करना भी उतना ही जरूरी है। भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए विकास योजनाओं में प्रकृति और सुरक्षा दोनों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने किन विषयों पर दी जानकारी?

संगोष्ठी के दौरान टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने सुरक्षित और टिकाऊ आधारभूत ढांचे, आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा पर्यावरण के अनुकूल विकास मॉडल पर विस्तृत प्रस्तुति दी। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि विकास कार्य प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर किए जाएं, तो लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। यह मॉडल आने वाले समय में शहरी क्षेत्रों के लिए अधिक लाभदायक साबित होगा।

कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ और सेवानिवृत्त मुख्य नगर योजनाकारों ने अपने लंबे प्रशासनिक और तकनीकी अनुभव साझा किए। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सामने आई चुनौतियों, नए प्रयोगों और सफल योजनाओं के बारे में जानकारी दी। साथ ही युवा अधिकारियों और नगर योजनाकारों को बेहतर योजना निर्माण और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि विभिन्न राज्यों के सफल मॉडल का अध्ययन करने से हिमाचल प्रदेश को भविष्य की जरूरतों के अनुसार बेहतर शहरी विकास योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी। इससे शहरों में आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और आपदा प्रबंधन भी अधिक प्रभावी बनेगा। यही कारण है कि इस तरह की संगोष्ठियां भविष्य की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

इस अवसर पर मुख्य नगर योजनाकार राज कुमार सिंह, आईटीपीआई हरियाणा रीजनल चैप्टर के चेयरमैन संजय कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, नगर नियोजन विशेषज्ञ और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने बेहतर शहरी विकास और राज्यों के बीच अनुभव साझा करने की इस पहल को भविष्य के लिए उपयोगी बताया।

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