हरोली के तालाब बदलेंगे तस्वीर, 11.75 करोड़ की बड़ी योजना शुरू
हरोली के तालाब बदलेंगे तस्वीर, 11.75 करोड़ की बड़ी योजना शुरू

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

June 29, 2026 12:19 p.m. 309

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हरोली क्षेत्र में पारंपरिक तालाबों को फिर से उपयोगी बनाने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया गया है। जल शक्ति विभाग 11.75 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत कई पुराने तालाबों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्जीवन कर रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण, भूजल स्तर को बढ़ाना, पानी की गुणवत्ता सुधारना और भविष्य के लिए सुरक्षित जल व्यवस्था तैयार करना है। इसके साथ ही तालाबों के आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा।

हर तालाब के लिए अलग योजना क्यों बनाई गई?

इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि सभी तालाबों के लिए एक जैसी योजना नहीं बनाई गई है। जल शक्ति विभाग ने प्रत्येक तालाब की स्थिति, जल स्रोत, आसपास के क्षेत्र, प्रदूषण के स्तर और स्थानीय जरूरतों का अलग-अलग अध्ययन किया है। इसके बाद उसी के अनुसार वैज्ञानिक तकनीकों का चयन किया गया है, ताकि हर तालाब का बेहतर तरीके से पुनर्जीवन किया जा सके।

तालाबों में कौन-कौन से आधुनिक काम किए जा रहे हैं?

परियोजना के तहत तालाबों से गाद हटाई जा रही है और उनके तटबंध मजबूत किए जा रहे हैं। साथ ही भूजल पुनर्भरण के लिए विशेष संरचनाएं बनाई जा रही हैं। जहां जरूरत है, वहां पानी को साफ करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इनमें प्राकृतिक तरीके से पानी साफ करने वाली व्यवस्था, तालाब के अंदर ही जल शुद्धिकरण प्रणाली और पानी में ऑक्सीजन बढ़ाने वाली तकनीक शामिल हैं। इसके अलावा वर्षा के साथ आने वाली गाद और कचरे को रोकने के लिए भी विशेष संरचनाएं बनाई जा रही हैं।

कौन-कौन से तालाब इस योजना में शामिल हैं?

जल शक्ति विभाग के अनुसार पहले चरण में पुबोवाल, दुलैहड़ और गोंदपुर जयचंद सहित कई प्रमुख तालाबों पर काम चल रहा है। पुबोवाल तालाब के पुनर्जीवन पर लगभग दो करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि दुलैहड़ तालाब पर करीब 1.26 करोड़ रुपये की लागत से कार्य जारी है। कई हिस्सों में काम लगभग पूरा हो चुका है और बाकी कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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क्या इस योजना से भूजल स्तर बढ़ेगा?

फरवरी 2025 में तैयार व्यवहार्यता रिपोर्ट के अनुसार परियोजना पूरी होने के बाद हर साल लगभग 58 लाख घन मीटर भूजल पुनर्भरण क्षमता विकसित होगी। इससे क्षेत्र में करीब 0.90 मिलियन लीटर प्रतिदिन अतिरिक्त जल उपलब्ध होने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार केवल पुबोवाल तालाब से ही लगभग 32 लाख घन मीटर वार्षिक भूजल पुनर्भरण होगा, जबकि छह छोटे तालाब मिलकर करीब 26 लाख घन मीटर की क्षमता विकसित करेंगे।

भविष्य की जल सुरक्षा के लिए क्यों है यह योजना अहम?

हरोली क्षेत्र में वर्षभर सीमित समय तक ही बारिश होती है। ऐसे में वर्षा की हर बूंद को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी माना जा रहा है। वर्तमान में यह क्षेत्र भूजल दोहन के मामले में सुरक्षित श्रेणी में है, लेकिन बढ़ती आबादी, जल की बढ़ती मांग और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए यह परियोजना भविष्य की जल जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक जल स्रोतों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ जोड़ने का यह मॉडल हिमाचल प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। इससे केवल जल संरक्षण ही नहीं होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जलीय जीवों की सुरक्षा, प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय स्तर पर ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।

जल शक्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण केवल आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की जल सुरक्षा का आधार भी है। इसी सोच के साथ हरोली में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए यह परियोजना लागू की जा रही है। उनका विश्वास है कि यह मॉडल भविष्य में हिमाचल प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

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