Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य संस्थानों के युक्तिकरण को लेकर राज्य सरकार बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में कहा कि सरकार इस दिशा में विचार कर रही है कि एक पंचायत में एक ही स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो। जिन पंचायतों में एलोपैथी का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यानी PHC और आयुर्वेद स्वास्थ्य केंद्र दोनों मौजूद हैं, वहां एक संस्थान को जरूरत के अनुसार दूसरी पंचायत में स्थानांतरित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं का बेहतर वितरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार जल्द युक्तिकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में स्पष्ट किया कि ऐसी पंचायतों की समीक्षा की जाएगी, जहां एक ही क्षेत्र में एलोपैथी और आयुर्वेद दोनों स्वास्थ्य संस्थान कार्यरत हैं।
सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य केंद्रों को इस तरह व्यवस्थित करना है कि अधिक से अधिक पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों तक चिकित्सा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
अगर किसी पंचायत में पहले से PHC उपलब्ध है और वहीं आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र भी संचालित हो रहा है, तो उनमें से किसी एक केंद्र को ऐसी पंचायत में स्थानांतरित करने पर विचार किया जाएगा, जहां स्वास्थ्य सुविधा की अधिक जरूरत है।
यह मुद्दा विधानसभा में अर्की के विधायक संजय अवस्थी के सवाल के दौरान सामने आया। उन्होंने अर्की विधानसभा क्षेत्र के तहत मज्याठ में वर्ष 2017 में खोले गए आयुर्वेदिक औषधालय में स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर सवाल किया।
उन्होंने बताया कि अलग पद सृजित नहीं होने के कारण यहां कर्मचारियों की व्यवस्था प्रतिनियुक्ति के माध्यम से की जा रही है। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस स्वास्थ्य संस्थान में स्थायी स्टाफ की नियुक्ति कब की जाएगी।
आयुर्वेद मंत्री यादविंद्र गोमा ने सदन में कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य संस्थानों के युक्तिकरण की प्रक्रिया पर काम कर रही है। इस प्रक्रिया के तहत कर्मचारियों और स्वास्थ्य केंद्रों की आवश्यकता की समीक्षा के बाद फैसला लिया जाएगा।
इसी दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हस्तक्षेप करते हुए एक पंचायत में एक स्वास्थ्य संस्थान की व्यवस्था पर सरकार की सोच स्पष्ट की।
प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर उन पंचायतों को फायदा हो सकता है, जहां वर्तमान में प्राथमिक स्तर की स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं है या स्वास्थ्य केंद्र दूर स्थित हैं।
सरकार का प्रयास मौजूदा संसाधनों और कर्मचारियों का बेहतर उपयोग करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में संतुलित तरीके से उपलब्ध करवाना है।
हालांकि किन स्वास्थ्य केंद्रों को स्थानांतरित किया जाएगा और युक्तिकरण कब से लागू होगा, इस संबंध में विस्तृत प्रक्रिया सरकार के आगामी फैसले के बाद स्पष्ट होगी।
मुख्यमंत्री के बयान का अर्थ प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों को बंद करना नहीं है। सरकार उन पंचायतों में स्वास्थ्य संस्थानों के युक्तिकरण पर विचार कर रही है, जहां एक ही पंचायत में एलोपैथी PHC और आयुर्वेद केंद्र दोनों मौजूद हैं।
ऐसे मामलों में जरूरत और भौगोलिक स्थिति के आधार पर किसी एक संस्थान को दूसरी पंचायत में स्थानांतरित किया जा सकता है।
सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों और कर्मचारियों को जरूरत के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात करना है, ताकि एक ही पंचायत में सुविधाओं के दोहराव के बजाय उन इलाकों को भी स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा सके जहां ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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