Post by : Khushi Joshi
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता में हुए पहले टेस्ट मैच में मिली हार ने भारतीय टीम की योजना, टीम चयन और पिच रणनीति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हार के बाद पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली आवाज़ों में से एक सौरव गांगुली ने मुख्य कोच गौतम गंभीर को सीधे और स्पष्ट शब्दों में महत्वपूर्ण सलाह दी है। गांगुली का कहना है कि भारत को जल्दबाज़ी में टेस्ट खत्म करने की कोशिश छोड़कर पारंपरिक पांच दिनों की टेस्ट मानसिकता अपनानी चाहिए, क्योंकि यही असली टेस्ट क्रिकेट की पहचान है और इसी में टीम की ताकत उभरकर सामने आती है।
गांगुली ने कहा कि अच्छी और संतुलित पिचों पर ही भारतीय बल्लेबाजों का असली कौशल निखरता है। उनके अनुसार, यदि भारतीय बल्लेबाज पहली पारी में 350–400 रन का मजबूत स्कोर खड़ा नहीं कर पाते, तो मैच जीतना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने याद दिलाया कि इंग्लैंड में भारत ने इसलिए शानदार प्रदर्शन किया था क्योंकि बल्लेबाजों ने रन बनाए, गेंदबाजों को समय मिला और मैच खेल के प्राकृतिक प्रवाह में पांच दिन तक चला। गांगुली का कहना है कि गंभीर को यह समझना होगा कि टेस्ट मैच को कृत्रिम रूप से छोटा करने से न तो बल्लेबाजों को समय मिलता है, न गेंदबाजों को रणनीति बनाने का मौका।
पूर्व कप्तान ने स्पष्ट कहा कि एक कोच के रूप में गंभीर को अपनी टीम पर भरोसा रखना चाहिए—खासकर गेंदबाजी तिकड़ी जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और मोहम्मद शमी पर। गांगुली ने यह भी याद दिलाया कि भारतीय क्रिकेट ने 2000 के दशक में और फिर 2018–2021 के विदेशी दौरों में इन्हीं तेज गेंदबाजों की बदौलत टेस्ट में विश्वसनीयता हासिल की है। गांगुली के अनुसार, शमी की लाइन-लेंथ और स्विंग किसी भी पिच पर मैच का रुख बदल सकती है, इसलिए उनके अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने स्पिन विभाग को लेकर भी कहा कि भारत के पास शीर्ष स्तर के स्पिनर हैं, जो तेज गेंदबाजों के साथ मिलकर घरेलू परिस्थितियों में किसी भी टीम को चुनौती दे सकते हैं। उनका कहना है कि पिच को अत्यधिक स्पिनिंग बना देने से खेल एकतरफा नहीं होता, बल्कि टीम के बल्लेबाज खुद दबाव में आ जाते हैं। गंभीर को चाहिए कि वे संतुलित पिचों पर खेलकर टीम की असली क्षमता सामने लाएं।
इसी बीच टीम के लिए एक और झटका शुभमन गिल की फिटनेस को लेकर आया है। कोलकाता टेस्ट की पहली पारी में गिल तीन गेंद खेलने के बाद ही रिटायर हर्ट हो गए थे और दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने नहीं उतरे। गर्दन में तेज ऐंठन की समस्या के बाद उन्हें वुडलैंड्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भले ही बाद में उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया हो, लेकिन टीम मैनेजमेंट उनकी उपलब्धता को लेकर आश्वस्त नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुवाहाटी में होने वाला दूसरा टेस्ट उनके बिना खेला जा सकता है। टीम प्रबंधन अभी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचा है, लेकिन गिल की मौजूदा स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।
भारतीय क्रिकेट में यह समय परिवर्तन का है, और दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीम के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला टीम की रणनीति, संयोजन और नेतृत्व क्षमता की असली परीक्षा है। गांगुली की सलाह ऐसे समय आई है, जब कोच गंभीर और टीम को ठोस सुधार की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या टीम इन सुझावों को गंभीरता से लेकर रणनीति बदलती है या कोच गंभीर अपने तरीकों पर ही कायम रहते हैं।
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