Post by : Khushi Joshi
शिमला के प्रसिद्ध जाखू रोपवे पर बुधवार को आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक हाई-अलर्ट मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अभ्यास का मकसद यह परखना था कि यदि किसी तकनीकी खराबी या अचानक आई आपदा के कारण रोपवे की ट्रॉली ऊंचाई पर ही रुक जाए, तो उसमें फंसे लोगों को सुरक्षित कैसे निकाला जाए। सुबह करीब 11 बजे इस अभ्यास की शुरुआत की गई, जिसमें रोपवे की एक ट्रॉली को जमीन से लगभग 100 मीटर की ऊंचाई पर रोककर वास्तविक जैसी आपात स्थिति बनाई गई।
इस दौरान एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और होमगार्ड के प्रशिक्षित जवानों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन का अभ्यास किया। रस्सियों, हार्नेस और आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की मदद से जवानों ने ट्रॉली में मौजूद लोगों को एक-एक कर सुरक्षित नीचे उतारने का सफल प्रदर्शन किया। पूरे अभ्यास के दौरान सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा गया और प्रत्येक व्यक्ति को सही तरीके से हार्नेस पहनाकर ही नीचे लाया गया, ताकि किसी भी प्रकार की चूक न हो।
इस मॉक ड्रिल की निगरानी जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में की गई और इसकी अगुवाई अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (प्रोटोकॉल) ज्योति राणा ने की। उन्होंने बताया कि यह अभ्यास केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाली किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने का एक अहम कदम है। जाखू रोपवे पर बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग प्रतिदिन आते-जाते हैं, ऐसे में किसी भी तकनीकी समस्या या प्राकृतिक कारण से रोपवे रुकने की स्थिति में त्वरित और सुरक्षित रेस्क्यू बेहद जरूरी हो जाता है।
ड्रिल के दौरान रेस्क्यू टीमों के तालमेल, प्रतिक्रिया समय और उपकरणों के उपयोग की दक्षता का भी मूल्यांकन किया गया। इसके अलावा आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न आधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें ऊंचाई से बचाव उपकरण, रस्सी आधारित प्रणाली, सेफ्टी हार्नेस, पुली सिस्टम और अन्य सुरक्षा संसाधनों को प्रदर्शित किया गया। इससे आम लोगों को भी यह समझने का मौका मिला कि आपात स्थिति में कैसे काम किया जाता है।
जाखू रोपवे की संचालन टीम, पुलिस विभाग, होमगार्ड और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी इस अभ्यास में उपस्थित रहे। सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए यह अभ्यास बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिला प्रशासन ने साफ किया कि इस तरह की मॉक ड्रिल्स भविष्य में भी जारी रहेंगी, ताकि आपदा की किसी भी स्थिति में शिमला के लोग और पर्यटक पूरी तरह से सुरक्षित रह सकें।
जाखू रोपवे पर हुआ यह हाई-अलर्ट अभ्यास इस बात का संकेत है कि प्रशासन पर्यटकों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता और हर परिस्थिति के लिए पहले से तैयार रहने की रणनीति पर काम कर रहा है।
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