Post by : Khushi Joshi
शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि भारत की राजनयिक और सामरिक स्थिति भी जटिल मोड़ पर पहुँच गई है। यह फैसला दक्षिण एशिया की राजनीति में एक ऐसा क्षण बन गया है, जहाँ न्याय, प्रतिशोध और शक्ति का संघर्ष एक-दूसरे में उलझ गया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय कानूनी प्रक्रिया से ज्यादा राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का परिणाम प्रतीत होता है, जिसने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता की भावना को और गहरा कर दिया है।
भारत के लिए स्थिति इसलिए और मुश्किल हो गई है क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना इस समय भारत में ही रह रही हैं। ढाका की अंतरिम सरकार ने पहले ही उनकी वापसी की मांग कर दी है, लेकिन नई दिल्ली एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ हर निर्णय के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यदि भारत हसीना को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के हवाले करता है, तो ऐसा कदम उन आलोचकों के आरोपों को मजबूती देगा जो इस फैसले को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हैं। अवामी लीग — जो लंबे समय से भारत की विश्वसनीय सहयोगी रही है — इस कदम को विश्वासघात के रूप में देख सकती है, जिससे भारत-समर्थक भावनाओं को गहरा आघात पहुंचेगा।
दूसरी ओर, यदि भारत शेख हसीना को सुरक्षा और शरण देना जारी रखता है, तो अंतरिम सरकार और कट्टरपंथी समूह भारत पर ‘हस्तक्षेपकारी’ देश होने का आरोप लगाएंगे। इसका सीधा असर दोनों देशों के राजनयिक संबंधों पर पड़ेगा। सीमा सुरक्षा सहयोग, व्यापार समझौते, नदी जल साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर अविश्वास की स्थिति बन सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यह परिस्थिति उन उग्रवादी और भारत-विरोधी संगठनों को भी हवा दे सकती है, जो पहले से ही क्षेत्रीय तनाव का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
बांग्लादेश में भी हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। सजा के ऐलान के बाद ढाका तथा कई अन्य जिलों में हिंसा भड़क उठी है, जिनको देखते हुए यूनुस अंतरिम सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच कई स्थानों पर टकराव की घटनाएँ सामने आई हैं, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है। यह भी बताया जा रहा है कि अवामी लीग के समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की रफ्तार तेज हो रही है।
भारत के सामने सबसे महत्वपूर्ण दुविधा यह है कि क्या वह मानवाधिकार, विधिक प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर निर्णय ले, या फिर क्षेत्रीय स्थिरता, दीर्घकालिक सुरक्षा हितों और रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता दे। शेख हसीना वह नेता रही हैं, जिन्होंने बांग्लादेश को चीन के प्रभाव में पूरी तरह झुकने नहीं दिया और भारत के साथ मजबूत सहयोग बनाए रखा। ऐसे में, उनका भविष्य भारत की कूटनीति पर गहरा असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में भारत का रुख न केवल बांग्लादेश बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति की दिशा तय करेगा। यह मामला अब सिर्फ एक नेता का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन, राष्ट्रीय हितों और अंतरराष्ट्रीय विश्वास की परीक्षा बन चुका है।
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