Post by : Shivani Kumari
मंडी से सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने हाल ही में एक वीडियो संदेश में खादी उत्पादों को अपनाने की अपील की है। 30 अक्टूबर, 2025 को जारी किए गए इस वीडियो में उन्होंने पारंपरिक परिधान पहनकर खादी के साबुन और शैंपू जैसे उत्पादों को बढ़ावा दिया। यह अपील उनके 2 अक्टूबर, 2025 को गांधी जयंती के अवसर पर दिए गए संदेश के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में युवाओं से भारतीय उद्योगों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था।
कंगना ने कहा, "खादी न केवल हमारे पारंपरिक मूल्यों का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे ग्रामीण कारीगरों और बुनकरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का भी एक साधन है।" उन्होंने एक खादी साड़ी की खरीदारी की तस्वीरें साझा करते हुए युवाओं से विदेशी ब्रांडों के बजाय भारतीय उत्पादों को चुनने का आग्रह किया।
खादी की बिक्री वित्तीय वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 1.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो 2013 के बाद से 447% की वृद्धि दर्शाती है। यह वृद्धि ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जहां 1.5 मिलियन से अधिक कारीगरों को लाभ पहुंचा है।
खादी का इतिहास भारत की स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ा हुआ है। महात्मा गांधी ने खादी को स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनाया। उन्होंने भारतीयों से विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करने और खादी को अपनाने का आह्वान किया, ताकि स्थानीय बुनकरों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा सके।
गांधी के दृष्टिकोण के अनुसार, खादी केवल एक कपड़ा नहीं था, बल्कि यह एक आंदोलन था जो भारतीयों को एकजुट करने और colonial शोषण के खिलाफ लड़ने में मदद करता था। आज, खादी न केवल एक पारंपरिक वस्तु है, बल्कि यह सस्टेनेबिलिटी और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली का भी प्रतीक बन गया है।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में खादी उत्पादों की बिक्री 1.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह 2013-14 में 31,000 करोड़ रुपये से 447% की वृद्धि दर्शाता है। इस वृद्धि के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "वोकल फॉर लोकल" पहल और खादी को बढ़ावा देने के प्रयास शामिल हैं।
KVIC के अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा, "यह वृद्धि केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत में लाखों लोगों के जीवन को बदल रही है। खादी ने 1.5 मिलियन से अधिक कारीगरों को रोजगार प्रदान किया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर रहा है।"
कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग खादी को बढ़ावा देने के लिए किया है। उन्होंने एक पोस्ट में लिखा, "आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, मैंने आज वोकल फॉर लोकल के तहत खादी इंडिया स्टोर से एक खादी साड़ी खरीदी और UPI के माध्यम से भुगतान किया। मैं सभी से विनम्रता से अनुरोध करती हूं कि वे स्वदेशी सामान को बढ़ावा दें और भारत में बने उत्पादों का उपयोग करें, ताकि हम मिलकर एक मजबूत अर्थव्यवस्था का निर्माण कर सकें।"
"खादी हमारे देश की आत्मा है। यह केवल एक कपड़ा नहीं है, बल्कि यह हमारे कारीगरों की मेहनत और समर्पण का प्रतीक है।" - कंगना रनौत
युवाओं के बीच खादी की स्वीकार्यता में वृद्धि हुई है, विशेष रूप से फैशन और सस्टेनेबिलिटी के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ। हालांकि, still कई चुनौतियां बनी हुई हैं, जैसे कि खादी उत्पादों की उच्च कीमत और urban बाजारों में उनकी उपलब्धता।
कंगना ने इन चुनौतियों को दूर करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया का उपयोग करने की वकालत की है। उन्होंने कहा, "युवाओं को खादी के फायदों के बारे में शिक्षित करना महत्वपूर्ण है। यह न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि यह हमारे स्थानीय कारीगरों को भी समर्थन प्रदान करता है।"
खादी का एक प्रमुख लाभ इसका पर्यावरण अनुकूल होना है। यह हाथ से बुना जाता है और chemical-free होता है, जिससे यह सस्टेनेबल फैशन का एक आदर्श उदाहरण बन जाता है। इसके अलावा, खादी के उत्पादन में पानी और ऊर्जा की खपत कम होती है, जो climate change से लड़ने में मदद करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खादी की मांग बढ़ने से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा।
सरकार ने खादी को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं, जैसे कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) और स्वदेशी उद्यमिता को प्रोत्साहित करना। इन पहलों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं और खादी उत्पादों की पहुंच urban बाजारों तक विस्तारित हुई है।
भविष्य में, खादी को global market में बढ़ावा देने की संभावनाएं हैं। विशेष रूप से, fashion industry में खादी के उपयोग को बढ़ाने से यह न केवल भारतीय कारीगरों को लाभ पहुंचाएगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर को भी global stage पर प्रस्तुत करेगा।
कंगना रनौत की खादी उत्पादों को अपनाने की अपील एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल भारतीय उद्योगों को बढ़ावा देती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी मदद करती है। खादी की बिक्री में रिकॉर्ड वृद्धि और इसके पर्यावरण अनुकूल पहलू इसे एक सस्टेनेबल और patriotic choice बनाते हैं।
जैसे-जैसे युवापीढ़ी सस्टेनेबिलिटी और स्थानीय उत्पादों की ओर रुझान दिखा रही है, खादी का भविष्य उज्ज्वल लगता है। यह केवल एक कपड़ा नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा और उसकी विरासत का प्रतीक है।
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