Post by : Shivani Kumari
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरंभ किया गया हरित भारत मिशन देश को पर्यावरण की दृष्टि से मजबूत, आत्मनिर्भर और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए स्थापित किया गया है। इसका लक्ष्य वर्ष 2035 तक भारत को 65% अक्षय ऊर्जा पर निर्भर बनाना है। इस मिशन के अंतर्गत मुख्य रूप से सौर, पवन, जल और हरित हाइड्रोजन जैसी पर्यावरण रक्षा वाली तकनीकों को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है। सभी राज्य, ग्रामीण और शहरी क्षेत्र, स्थानीय समुदाय, निजी और सार्वजनिक भूमि पर मिलकर अधिकतम हरियाली लाने हेतु कार्यरत हैं।
हरित भारत मिशन की पृष्ठभूमि वर्ष 2011 में बनी, जब इसे राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना के एक भाग के रूप में शुरू किया गया। मिशन का मुख्य उद्देश्य वनों और वृक्षों के आवरण को बढ़ाना, घटते वन क्षेत्र की रक्षा करना, पारिस्थितिक तंत्र (जैसे आर्द्रभूमि, मैंग्रोव, जैव विविधता, एवं जल चक्र) को बहाल करना और कार्बन संग्रहण क्षमता को सशक्त बनाना है। सरकार ने 2025 तक 24 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर वृक्षारोपण तथा 5 मिलियन हेक्टेयर वन और गैर-वन भूमि की गुणवत्ता सुधारने का लक्ष्य रखा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015-16 से 2021-22 के बीच 11.22 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर वृक्षारोपण एवं संवर्द्धन के कार्य हुए। CAMPA (क्षतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण) फंड का उपयोग इसी बहुआयामी कार्यक्रमों के लिए किया जा रहा है, जिससे कार्बन डूब (कार्बन सिंक) निर्माण तथा जलवायु लक्ष्य पूरे किए जा सकें। इस मिशन की बदौलत वन-आश्रित परिवारों की आजीविका बढ़ाने व ग्रामीण क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने में भी सहायता मिल रही है।
पर्यावरण मंत्रालय और विशेषज्ञों के अनुसार, अगर स्थानीय समुदाय, वन विभाग और पंचायतें पूरी भागीदारी से काम करें, तो न सिर्फ भारत के वन, अपितु पूरी पारिस्थितिकी के सतत संरक्षण एवं विकास का रास्ता मजबूत बनेगा। विशेषज्ञों का मत है कि कार्बन डूब निर्माण, देश के जलवायु लक्ष्यों, तथा ग्रामीण आजीविका के लिए यह मिशन अनिवार्य है।
देश के नागरिकों एवं मीडिया ने मिशन की सराहना की, क्योंकि इससे रोजगार के अवसर, आजीविका, जैव विविधता व जल संरक्षण में सुधार, और गाँव-शहर दोनों में हरियाली में वृद्धि हुई है। कई सरकारी एवं निजी कंपनियाँ भी इसमें निवेश कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की इस पहलकदमी को जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध ठोस एवं बहुआयामी प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
हरित भारत मिशन के तहत समाज, अर्थव्यवस्था, नीति, तथा उद्योग—सभी क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। वनों की बहाली, भूमि क्षरण की रोकथाम, जल संसाधनों की रक्षा, तथा बायोडायवर्सिटी की वृद्धि/सुरक्षा इसमें शामिल हैं। यह मिशन भारत के सतत विकास के लिए एक मील का पत्थर है। नीति व क्रियान्वयन की निरंतर निगरानी के साथ, अगले कुछ वर्षों में नवीनतम शोध/नीति बदलाव की संभावना बनी रहेगी।
इस पूरी प्रक्रिया में, सभी अद्यतन सरकारी अधिसूचनाओं व स्रोतों का ध्यान रखना आवश्यक है।
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