ऊना के 41 हजार किसान डिजिटल रजिस्ट्री से जुड़े, अब सरकारी योजनाएं होंगी और आसान
ऊना के 41 हजार किसान डिजिटल रजिस्ट्री से जुड़े, अब सरकारी योजनाएं होंगी और आसान

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

July 10, 2026 6:35 p.m. 111

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में खेती को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। एग्रीस्टैक परियोजना के तहत जिले के 41 हजार से अधिक किसानों का डिजिटल पंजीकरण किया जा चुका है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को एक डिजिटल पहचान देना है, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं का लाभ बिना किसी परेशानी के समय पर मिल सके। डिजिटल व्यवस्था लागू होने से किसानों को बार-बार दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता भी कम होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

41 हजार से अधिक किसान बने डिजिटल रजिस्ट्री का हिस्सा

कृषि विभाग के अनुसार, ऊना जिले में अब तक 41,861 किसानों का पंजीकरण एग्रीस्टैक पोर्टल पर किया जा चुका है। प्रत्येक किसान को आधार से जुड़ी 11 अंकों की एक विशेष किसान पहचान संख्या दी जाएगी। यही पहचान भविष्य में किसान की डिजिटल आईडी के रूप में काम करेगी। इसके माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, दस्तावेजों के सत्यापन और विभिन्न कृषि सेवाओं का उपयोग करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान होगा।

एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेगी पूरी जानकारी

एग्रीस्टैक के माध्यम से किसान की पहचान, भूमि का रिकॉर्ड, फसल का विवरण और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। इससे अलग-अलग विभागों में बार-बार दस्तावेज जमा कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार का उद्देश्य किसानों के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे सभी जरूरी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।

सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा आसानी से

डिजिटल किसान रजिस्ट्री बनने के बाद किसानों को कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा मिलेगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिक्री, फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और तेज़ तरीके से किसानों तक पहुंच सकेगा। इससे पात्र किसानों की पहचान भी आसानी से हो सकेगी और योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा।

डिजिटल क्रॉप सर्वे से तैयार हो रहा खेती का रिकॉर्ड

ऊना जिले में डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। अब तक लाखों खेतों का सर्वे पूरा किया जा चुका है और अधिकांश सर्वे को स्वीकृति भी मिल चुकी है। मोबाइल ऐप और जीपीएस तकनीक की मदद से खेतों की मैपिंग कर फसलों का वास्तविक रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इससे भविष्य में कृषि योजनाएं बनाने और किसानों की जरूरतों के अनुसार निर्णय लेने में भी मदद मिलेगी।

किसानों को मिलेंगी कई नई सुविधाएं

फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों को अनेक नई सुविधाएं उपलब्ध होंगी। फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिक्री और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया पहले से अधिक सरल होगी। साथ ही भूमि, मिट्टी, फसल और मौसम के आधार पर वैज्ञानिक कृषि सलाह भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे खेती की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार की संभावना बढ़ेगी।

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पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क

जिन किसानों ने अभी तक अपना पंजीकरण नहीं कराया है, वे अपने नजदीकी लोक मित्र केंद्र या एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से निशुल्क पंजीकरण कर सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, भूमि का खसरा नंबर और आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर आवश्यक होगा। कृषि विभाग लगातार गांव-गांव जाकर किसानों को इस योजना के बारे में जागरूक भी कर रहा है।

एग्रीस्टैक और डिजिटल किसान रजिस्ट्री जैसी पहलें हिमाचल प्रदेश में कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे रही हैं। ऊना जिले के 41 हजार से अधिक किसानों का इस अभियान से जुड़ना इस बात का संकेत है कि किसान अब आधुनिक तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं। आने वाले समय में यह व्यवस्था खेती को अधिक पारदर्शी, आसान और किसान हितैषी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही सरकार को भी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन करने और किसानों तक समय पर लाभ पहुंचाने में मदद मिलेगी।

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