Author : Rajesh Vyas
कृषि विभाग हमेशा यह सुनिश्चित करता है कि किसानों को केवल उच्च गुणवत्ता वाले और भरोसेमंद बीज मिलें। इस संबंध में जानकारी देते हुए उप कृषि निदेशक, जिला कांगड़ा, डॉ. कुलदीप धीमान ने बताया कि फसलों के बीज बेचने के लिए किसी भी व्यक्ति या संस्था को कृषि विभाग से लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। डॉ. धीमान ने स्पष्ट किया कि लाइसेंस जारी करने से पहले विभाग यह सुनिश्चित करता है कि विक्रेता केवल मान्यता प्राप्त स्रोतों से बीज खरीदे और बेचे, ताकि किसानों को गुणवत्ताहीन बीज से नुकसान न हो। विभाग कभी भी खुले में, सड़क किनारे या गैर सुरक्षित स्थान पर बीज बिक्री की अनुमति नहीं देता।
हालांकि, हाल के समय में कई शिकायतें सामने आई हैं कि कुछ झोला छाप बीज विक्रेता घटिया किस्म का बीज सड़कों और बाजारों में बेच रहे हैं, जिनके पास कृषि विभाग से कोई लाइसेंस नहीं है। ऐसे विक्रेता आमतौर पर सस्ते बीज के लालच में किसानों को धोखा देते हैं। इनसे खरीदे गए बीज या तो उगते ही नहीं हैं, या पैदावार बहुत कम होती है, जिससे किसान की चार-पाँच महीने की मेहनत व्यर्थ चली जाती है। यह समस्या खासकर छोटे और मध्यम किसान परिवारों के लिए गंभीर होती है, क्योंकि वे अपनी फसल पर पूरी निर्भरता रखते हैं।
डॉ. धीमान ने कहा कि झोला छाप बीज विक्रेताओं के खिलाफ कड़ाई से कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति बिना लाइसेंस के बीज बेचते हुए पकड़ा गया, तो सीड एक्ट के तहत उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। विभाग के बीज निरीक्षक द्वारा उस व्यक्ति से सारा बीज जब्त कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिना लाइसेंस के बीज बेचने वालों को जेल की सजा भी हो सकती है। इसका उद्देश्य किसानों को धोखाधड़ी से बचाना और गुणवत्ताहीन बीज की बिक्री को रोकना है।
डॉ. धीमान ने किसानों से अपील की कि वे हमेशा लाइसेंस प्राप्त बीज विक्रेताओं से ही बीज खरीदें, ताकि उन्हें अच्छी और भरोसेमंद उपज मिल सके। इसके अलावा, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री भी केवल लाइसेंसधारक विक्रेताओं से ही खरीदें। किसानों को यह समझना होगा कि सही स्रोत से बीज और कृषि सामग्री खरीदना उनकी फसल की सुरक्षा और भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कृषि विभाग किसानों को शिक्षित करने और उन्हें सुरक्षित बीज उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। विभाग यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी अनधिकृत विक्रेता किसानों को नुकसान न पहुँचाए। डॉ. धीमान ने कहा कि किसान जागरूक होंगे, तभी झोला छाप बीज विक्रेताओं का प्रभाव कम होगा। विभाग की यह पहल किसानों की सुरक्षा, फसल की गुणवत्ता और ग्रामीण कृषि विकास को मजबूत बनाने के लिए अहम है।
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