Post by : Himachal Bureau
शहरों में आज लोगों की सेहत सिर्फ दवा और इलाज तक सीमित हो गई है। हर दर्द की गोली और हर समस्या की दवा है, लेकिन लोग जल्दी ठीक तो हो जाते हैं, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ महसूस नहीं करते। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमने स्वास्थ्य को केवल शरीर तक सीमित कर दिया और प्रकृति, मौसम और अनुभव से जुड़ा ज्ञान भूलते चले गए। धार, झाबुआ और अलीराजपुर जैसे आदिवासी इलाके आज भी जंगलों को एक जीवित औषधालय मानते हैं। यहाँ पेड़-पौधे सिर्फ नाम से नहीं, बल्कि उनके गुणों से पहचाने जाते हैं। कौन-सी जड़ी कब तोड़नी है, कौन-सा काढ़ा किस मौसम में तैयार करना है, यह सब पीढ़ियों के अनुभव में दर्ज है।
जात्रा-2026 का आयोजन
इंदौर में पहली बार, 20 से 22 फरवरी 2026 तक गांधी हॉल परिसर में जात्रा-2026 का आयोजन होगा। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम जनजातीय सामाजिक सेवा समिति के तहत होगा। आयोजन में धार, झाबुआ और अलीराजपुर के जनजातीय क्षेत्रों की प्रमुख औषधियाँ और वनोपज विशेष रूप से प्रदर्शित की जाएँगी।
21 फरवरी को अमू काका बाबा न पोरिया फेम गायक आनंदीलाल भावेल अपनी टीम के साथ लाइव प्रस्तुति देंगे। 100 से ज्यादा स्टॉल लगाए जाएंगे और ट्रायबल फाउंडेशन द्वारा 25 से ज्यादा पेंटिंग्स प्रदर्शित की जाएँगी।
आदिवासी ज्ञान और अनुभव का महत्व
समिति के अध्यक्ष देवकीनंदन तिवारी का कहना है कि आदिवासी समाज का ज्ञान सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि अनुभव की कमाई है। देश-विदेश भले ही आधुनिक हो गया है, लेकिन जंगल, मौसम और जीवन को समझकर विकसित हुई औषधीय परंपरा आज भी उतनी ही उपयोगी है।
समिति के कोषाध्यक्ष गिरीश चव्हाण ने बताया कि वनोपज और औषधियाँ सिर्फ उत्पाद नहीं हैं, बल्कि यह प्रकृति के साथ तालमेल में जीवन जीने का तरीका दिखाती हैं। इस आयोजन में स्टॉल सिर्फ खरीदने-बेचने के लिए नहीं होंगे, बल्कि लोग सवाल पूछेंगे, सीखेंगे और समझेंगे कि स्वास्थ्य केवल दवा से नहीं, बल्कि जीवनशैली और प्रकृति के ज्ञान से बनता है।
आयोजन के मुख्य आकर्षण
जनजातीय कलाकारों की कला और हस्तशिल्प प्रदर्शनी
आदिवासी व्यंजनों के स्टॉल
विभिन्न अंचलों के जनजातीय नृत्य और लोक नृत्य
जनजातीय जीवन और परंपरा को दर्शाती पिथोरा आर्ट गैलरी
जनजातीय पर्व भगोरिया पर आधारित फोटो प्रदर्शनी
जनजातीय साहित्य और परिधानों के स्टॉल
यह आयोजन दर्शाता है कि आदिवासी संस्कृति सिर्फ देखने के लिए नहीं, बल्कि सीखने और अनुभव करने के लिए भी है।
'जात्रा-2026' हमें याद दिलाता है कि स्वास्थ्य का रास्ता हमेशा दवा से नहीं जाता। कभी-कभी यह जंगल, प्रकृति और अनुभव की पगडंडियों से भी आता है। यहाँ लोग सीखेंगे कि कौन-सी जड़ किस दर्द में उपयोगी है, कौन-सी छाल किस मौसम में ली जाती है और कैसे जीवनशैली से स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है।
इस आयोजन के माध्यम से यह ज्ञान शहर तक पहुँचेगा और नई पीढ़ी के लिए संरक्षित रहेगा। आदिवासी समाज आधुनिक तकनीक के बिना भी संतुलित जीवन जी रहा है और यह अनुभव हम सभी के लिए महत्वपूर्ण है।
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