Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य के जल शक्ति विभाग की पहली व्यापक 'वाटर लॉज ऑफ हिमाचल प्रदेश' पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक राज्य में जल शक्ति विभाग से जुड़े सभी प्रमुख कानूनों, नियमों, नीतियों, तकनीकी दिशा-निर्देशों और प्रशासनिक आदेशों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराती है। सरकार का मानना है कि यह दस्तावेज अधिकारियों, इंजीनियरों, ठेकेदारों और आम नागरिकों के लिए एक भरोसेमंद संदर्भ पुस्तक साबित होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक जल शक्ति विभाग से जुड़े विभिन्न कानून और नियम अलग-अलग दस्तावेजों में उपलब्ध थे, जिससे कई बार जानकारी जुटाने में कठिनाई होती थी। नई पुस्तक में इन सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को एक साथ संकलित किया गया है। इससे विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्णय लेने में आसानी होगी और कामकाज पहले से अधिक व्यवस्थित बनेगा। उन्होंने बताया कि यह पहल प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि यह पुस्तक विभाग में कार्यरत अधिकारियों, इंजीनियरों और अन्य कर्मचारियों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शक का काम करेगी। विशेष रूप से विभिन्न मंडलों, सर्किलों और जोनों में तैनात अधिकारियों को कानूनों और नियमों की सही जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि इससे फैसले लेने में स्पष्टता आएगी और सरकारी कार्यों में अनावश्यक भ्रम की स्थिति भी कम होगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पुस्तक का लाभ केवल सरकारी अधिकारियों तक सीमित नहीं रहेगा। जल शक्ति विभाग के साथ काम करने वाले ठेकेदारों को भी टेंडर प्रक्रिया, पंजीकरण के नियम, वित्तीय अधिकारों और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा आम नागरिक भी पानी के शुल्क, सरकारी सेवाओं के अधिकार, जल गुणवत्ता जांच प्रयोगशालाओं और अन्य संबंधित नियमों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। इससे विभाग और जनता के बीच पारदर्शिता बढ़ेगी।
'वाटर लॉज ऑफ हिमाचल प्रदेश' पुस्तक में जल शक्ति विभाग के कामकाज से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। इसमें विभिन्न कानून, सरकारी नीतियां, संचालन संबंधी दिशा-निर्देश, जल शुल्क, वित्तीय अधिकार, टेंडर प्रक्रिया, कानूनी मामलों, न्यायालय से जुड़े विषय, जल गुणवत्ता परीक्षण और अन्य प्रशासनिक प्रावधानों को सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया है। सरकार का कहना है कि यह पुस्तक विभाग के लिए एक "सिंगल विंडो रेफरेंस" के रूप में काम करेगी, जिससे आवश्यक जानकारी जल्दी उपलब्ध हो सकेगी।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि हिमाचल प्रदेश ने जल जीवन मिशन के तहत उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। राज्य के लगभग 99.9 प्रतिशत घरों तक नल से पेयजल सुविधा पहुंचाई जा चुकी है। यह उपलब्धि राज्य की मजबूत जल प्रबंधन व्यवस्था और बेहतर कार्यशैली को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और बेहतर जल सेवाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2026 में राष्ट्रीय जल पुरस्कार भी मिला है। यह सम्मान पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नई पुस्तक विभाग में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर प्रशासन को और मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि स्पष्ट नियम और प्रक्रियाएं होने से विभाग का काम पहले से अधिक आसान और प्रभावी बनेगा। साथ ही लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ समय पर और बिना किसी परेशानी के मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार ऐसी पहल कर रही है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत हो और नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलें।
इस पुस्तक का संपादन और संकलन जल शक्ति विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन, मुख्य अभियंता (शिमला जोन) इंजीनियर मुकेश हीरा और अधीक्षण अभियंता (शिमला जोन) इंजीनियर विजय कश्यप ने किया है। उन्होंने कई वर्षों से लागू विभिन्न नियमों, अधिनियमों और प्रशासनिक आदेशों को व्यवस्थित रूप से एक पुस्तक में संकलित किया है।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इस कार्य के लिए पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक भविष्य में जल शक्ति विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक साबित होगी और राज्य में बेहतर जल प्रबंधन तथा सुशासन को नई मजबूती देगी।
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