Author : Rajesh Vyas
पालमपुर स्थित चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में रक्षा कर्मियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। पुनर्वास महानिदेशालय द्वारा प्रायोजित इस दीर्घावधि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य सैन्य सेवा के बाद रक्षा कर्मियों को नए रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों के लिए तैयार करना है। चार माह तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को कृषि और उससे जुड़े विभिन्न क्षेत्रों की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी, ताकि वे भविष्य में अपना व्यवसाय स्थापित कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
कार्यक्रम का उद्घाटन लेफ्टिनेंट कर्नल नवीन तोमर ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सेना में सेवा देने वाले जवान देश की अमूल्य धरोहर हैं और सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें नई दिशा देने के लिए ऐसे कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि बदलते समय में स्वरोजगार और कौशल आधारित कार्यों की मांग लगातार बढ़ रही है तथा कृषि आधारित उद्यम पूर्व सैनिकों के लिए बेहतर अवसर प्रदान कर सकते हैं।
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. विनोद शर्मा ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय लंबे समय से रक्षा कर्मियों के कौशल विकास और क्षमता निर्माण के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्रबंधन कौशल और उद्यमिता की भी जानकारी दी जाएगी। इससे वे अपने क्षेत्रों में सफल व्यवसाय स्थापित करने में सक्षम बन सकेंगे।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 31 प्रतिभागी शामिल हुए हैं, जिनमें 30 भारतीय सेना और एक भारतीय नौसेना से संबंधित हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कृषि वानिकी, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन और बकरी पालन जैसे क्षेत्रों में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण, प्रदर्शन गतिविधियों और क्षेत्रीय भ्रमण के माध्यम से वास्तविक अनुभव भी प्रदान किया जाएगा।
प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. लव भूषण ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रशिक्षण को इस प्रकार तैयार किया गया है कि प्रतिभागी सीखने के साथ-साथ व्यवसायिक दृष्टिकोण भी विकसित कर सकें। उन्होंने कहा कि कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र आज तेजी से रोजगार के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं और पूर्व सैनिक इन क्षेत्रों में सफल उद्यमी बन सकते हैं।
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कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, वैज्ञानिक, एनसीसी अधिकारी, प्राध्यापक और अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल रक्षा कर्मियों के पुनर्वास में मदद करते हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सफल उद्यमी बनने की दिशा में भी प्रेरित करते हैं। भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन जारी रखा जाएगा ताकि अधिक से अधिक पूर्व सैनिकों को इसका लाभ मिल सके।
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