Author : Gopal Dutt Sharma
जो हिमाचल प्रदेश की प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक धरोहरों में गिना जाता है, इन दिनों बढ़ते प्लास्टिक कचरे की समस्या से जूझ रहा है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं, लेकिन बढ़ती आवाजाही के साथ पर्यावरण पर दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। इसी चिंता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही बलजीत कौर और उनकी संस्था ने चूड़धार क्षेत्र में विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर लोगों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया है।
हाल ही में आयोजित सफाई अभियान के दौरान शिखर, मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया। अभियान में शामिल टीम ने करीब 70 किलोग्राम प्लास्टिक अपशिष्ट हटाया। इसमें प्लास्टिक की बोतलें, खाद्य सामग्री के रैपर, पैकेजिंग सामग्री और अन्य गैर-जैविक कचरा शामिल था। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल वह कचरा है जो आसानी से दिखाई दे रहा था, जबकि जंगलों और पैदल यात्रा मार्गों के आसपास अभी भी काफी मात्रा में प्लास्टिक फैला हुआ है।
चूड़धार हिमाचल प्रदेश के सबसे लोकप्रिय धार्मिक और साहसिक पर्यटन स्थलों में से एक है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और प्रकृति प्रेमी यहां पहुंचते हैं। लेकिन कई लोग अपने साथ लाया गया कचरा वापस नहीं ले जाते, जिसके कारण क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या आने वाले वर्षों में और गंभीर रूप ले सकती है।
अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही बलजीत कौर ने कहा कि चूड़धार केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और हिमाचल की पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उनके अनुसार जंगलों और पहाड़ी मार्गों में फैला प्लास्टिक न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को प्रभावित कर रहा है, बल्कि वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए भी खतरा बनता जा रहा है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कुछ स्थानों पर प्लास्टिक कचरे को खुले में जलाया भी जा रहा है। इससे निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित करता है और वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यात्रा मार्गों पर पर्याप्त कूड़ेदान लगाए जाएं और कचरा प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
चूड़धार क्षेत्र वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत आता है। ऐसे क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष नियम लागू होते हैं। इसके बावजूद यदि प्लास्टिक कचरे का उचित प्रबंधन नहीं किया गया तो इससे पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे लोगों का कहना है कि प्रशासन, स्थानीय समुदाय और पर्यटकों को मिलकर इस चुनौती का समाधान निकालना होगा।
स्वच्छता अभियान को केवल एक दिन तक सीमित न रखते हुए संस्था ने इसे नियमित रूप से चलाने का फैसला किया है। अब प्रत्येक शनिवार और रविवार को सफाई अभियान आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ क्षेत्र को स्वच्छ बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा। संस्था ने स्थानीय युवाओं, सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं से भी इस अभियान में भाग लेने की अपील.
बलजीत कौर का मानना है कि जनभागीदारी के बिना किसी भी पर्यावरणीय अभियान को सफल नहीं बनाया जा सकता। यदि लोग स्वयं जागरूक होकर अपने कचरे का सही प्रबंधन करें और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी दिखाएं, तो चूड़धार को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना आसान हो सकता है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर बढ़ते कचरे की समस्या केवल चूड़धार तक सीमित नहीं है। देश के कई प्रमुख स्थलों पर इसी तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखा जा सके।
चूड़धार की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए शुरू की गई यह पहल अब एक जनआंदोलन का रूप लेने की दिशा में बढ़ रही है। यदि प्रशासन, स्थानीय लोग और पर्यटक मिलकर जिम्मेदारी निभाएं तो इस महत्वपूर्ण धार्मिक और प्राकृतिक धरोहर को प्लास्टिक मुक्त बनाना संभव हो सकता है।
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