हिमाचल हाईकोर्ट ने पूर्व डीजीपी को दी राहत, कारोबारी की शिकायत पर चल रही कार्यवाही हुई समाप्त
हिमाचल हाईकोर्ट ने पूर्व डीजीपी को दी राहत, कारोबारी की शिकायत पर चल रही कार्यवाही हुई समाप्त

Post by : Himachal Bureau

July 10, 2026 2:56 p.m. 110

हिमाचल प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) संजय कुंडू को एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले में बड़ी राहत मिली है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने उस मामले में शुरू की गई स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) की कार्यवाही को समाप्त कर दिया है, जिसमें पालमपुर के एक होटल कारोबारी ने उन्हें धमकाने का आरोप लगाया था।

अदालत के इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण समाप्त हो गया है। यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब होटल कारोबारी निशांत शर्मा ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को ई-मेल और आवेदन भेजकर आरोप लगाया था कि उन्हें धमकाया जा रहा है और मामले में न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

हाईकोर्ट ने क्यों लिया था स्वत: संज्ञान?

अक्टूबर 2023 में होटल कारोबारी की ओर से भेजे गए ई-मेल और शिकायत को गंभीर मानते हुए हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्वयं इस मामले का संज्ञान लिया था। अदालत ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को देखते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। शिकायत में दावा किया गया था कि उस समय के सबसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा शिकायतकर्ता को डराने और दबाव बनाने की कोशिश की गई। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पूरे मामले की निगरानी शुरू की थी।

संजय कुंडू ने आरोपों को बताया निराधार

पूर्व डीजीपी संजय कुंडू ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है और ई-मेल के माध्यम से उनकी छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि मामले को तथ्यों के बजाय आरोपों के आधार पर आगे बढ़ाया गया, जबकि जांच में ऐसी कोई सामग्री सामने नहीं आई जो शिकायत को साबित करती हो।

एसआईटी जांच में क्या सामने आया?

मामले की जांच के दौरान गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार जांच में शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। एसआईटी ने अपनी जांच में यह निष्कर्ष निकाला कि शिकायत में लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं पाए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि शिकायतकर्ता ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ ऐसे आरोप लगाए, जिनका पर्याप्त आधार जांच के दौरान नहीं मिला।

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अदालत ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश जी. एस. संधवालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने एसआईटी रिपोर्ट और उपलब्ध रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद स्वत: संज्ञान की कार्यवाही समाप्त करने का फैसला सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता ने न्यायिक प्रक्रिया का अनुचित उपयोग करने का प्रयास किया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कारोबारी विवाद में लाभ लेने और जांच के निष्कर्षों से ध्यान हटाने के उद्देश्य से शिकायत दर्ज कराई गई थी।

एफआईआर रद्द करने की रिपोर्ट का विरोध करने की अनुमति

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में पूर्व डीजीपी संजय कुंडू को यह भी अनुमति दी कि यदि होटल कारोबारी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने संबंधी रिपोर्ट पर कोई कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो वे उसका विधिक रूप से विरोध कर सकते हैं। इस अनुमति का अर्थ यह है कि संबंधित कानूनी प्रक्रिया में संजय कुंडू अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए अदालत के समक्ष अपना पक्ष रख सकेंगे।

हाईकोर्ट के इस फैसले के साथ इस मामले में स्वत: संज्ञान के तहत चल रही कार्यवाही समाप्त हो गई है। हालांकि यदि मामले से जुड़ी अन्य कानूनी प्रक्रियाएं आगे बढ़ती हैं, तो उनका निपटारा संबंधित न्यायालयों में कानून के अनुसार होगा। अदालत के आदेश के बाद पूर्व डीजीपी संजय कुंडू को इस मामले में बड़ी राहत मिली है। वहीं अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका फैसला एसआईटी की जांच रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर लिया गया है। यह आदेश राज्य के चर्चित मामलों में से एक माने जा रहे इस प्रकरण में एक महत्वपूर्ण न्यायिक विकास के रूप में देखा जा रहा है।

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