Post by : Himachal Bureau
शिमला जिला परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच समर्थन जुटाने की कोशिशें भी चर्चा में हैं। इसी बीच दो नवनिर्वाचित सदस्यों को लेकर सामने आई राजनीतिक चर्चा ने जिला परिषद के समीकरणों को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है। Shimla Zila Parishad Election से पहले चर्चा है कि भाजपा खेमे के समर्थन में बताए जा रहे दो नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्य अब कांग्रेस के संपर्क में हैं। यदि यह राजनीतिक बदलाव वास्तविक रूप लेता है तो अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले भाजपा की ओर से नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्यों को मीडिया के सामने पेश किया गया था। उस दौरान इन सदस्यों को भाजपा के समर्थन वाले खेमे का हिस्सा माना गया था। अब उन्हीं में से दो सदस्यों के कांग्रेस के साथ जाने की चर्चा सामने आने से Shimla Zila Parishad की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। हालांकि इस संबंध में संबंधित दोनों सदस्यों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सूत्रों के अनुसार रविवार को जिला परिषद के दो नवनिर्वाचित सदस्यों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर फिलहाल दोनों सदस्यों की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। Shimla Politics में इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि चुनाव में एक-एक सदस्य का समर्थन निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
जिला परिषद शिमला में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला पहले से ही रोचक बना हुआ है। दोनों दल अपने-अपने पक्ष में पर्याप्त समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। Zila Parishad Election में संख्या का संतुलन बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि किसी खेमे के दो सदस्य अपना समर्थन बदलते हैं तो इससे चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है।
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार यदि भाजपा समर्थित माने जा रहे दोनों सदस्य कांग्रेस के साथ आते हैं तो कांग्रेस के पक्ष में समीकरण मजबूत हो सकते हैं। दूसरी ओर भाजपा के लिए यह घटनाक्रम चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। Himachal Politics में स्थानीय स्तर पर जिला परिषद के चुनावों का अपना महत्व होता है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पदों पर किस दल का कब्जा होगा, इसका असर आगामी स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
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इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा नेताओं से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फिलहाल इस विषय पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वहीं, दोनों संबंधित जिला परिषद सदस्यों की ओर से भी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। Shimla News के इस राजनीतिक घटनाक्रम पर अब सभी की नजरें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव पर टिकी हैं। आने वाले समय में दोनों सदस्यों की स्थिति और उनका आधिकारिक रुख सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि जिला परिषद शिमला का राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाता है।
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