हिमाचल में नाबालिगों से दुष्कर्म के दो मामलों में दोषियों को 20 साल की सजा
हिमाचल में नाबालिगों से दुष्कर्म के दो मामलों में दोषियों को 20 साल की सजा

Post by : Himachal Bureau

Sept. 30, 2026 3:18 p.m. 121

हिमाचल प्रदेश में नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में रामपुर स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय की विशेष पोक्सो अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने दोनों मामलों में आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 20 साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर अलग-अलग जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत के इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों में कानून की सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों मामलों की सुनवाई किन्नौर क्षेत्र से जुड़े अपराधों के आधार पर हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से उप जिला न्यायवादी कमल चंदेल ने मामलों की पैरवी की। अदालत के सामने अभियोजन पक्ष ने घटनाओं से जुड़े साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर दोनों मामलों में दोष सिद्ध हुआ।

इलाज के लिए हिमाचल आई नाबालिग के साथ अपराध

पहला मामला एक ऐसी नाबालिग से जुड़ा है, जो गंभीर बीमारी के इलाज के लिए अपनी मां के साथ नेपाल से हिमाचल प्रदेश आई थी। अभियोजन के अनुसार, बच्ची के हृदय में जन्मजात समस्या थी और उसका उपचार करवाने के लिए परिवार रिकांगपिओ पहुंचा था। घटना के दिन बच्ची की मां किसी काम की तलाश में बाहर गई हुई थी। इसी दौरान बच्ची पानी लेने के लिए बाहर निकली। आरोप है कि इसी मौके का फायदा उठाकर आरोपी उसे अपने कमरे में ले गया और उसके साथ यौन अपराध किया। घटना के दौरान बच्ची ने हिम्मत दिखाते हुए आरोपी के मोबाइल फोन से अपनी मां को सूचना दी। मां को जानकारी मिलने के बाद उन्होंने तुरंत अपने परिचित को मौके पर भेजा। परिचित के पहुंचने पर कमरे का दरवाजा खुलवाया गया और आरोपी को पकड़ लिया गया। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

20 गवाहों की गवाही के बाद दोषी करार

मामले की जांच पुलिस अधिकारी भरत सिंह ने की। जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने करीब 20 गवाहों के बयान अदालत के सामने रखे। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद नेपाल निवासी राम बहादुर को दोषी ठहराया। उसे 20 साल की सजा के साथ 5 हजार रुपये जुर्माने का दंड दिया गया। मामला पोक्सो अधिनियम और संबंधित आपराधिक कानून की धाराओं के तहत चलाया गया।

दूसरे मामले में पिता ही बना आरोपी

दूसरा मामला पारिवारिक रिश्ते से जुड़ा और बेहद संवेदनशील है। अभियोजन के अनुसार, एक व्यक्ति पर अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ लंबे समय तक यौन शोषण करने का आरोप था। मामला कई वर्षों तक चले कथित शोषण से संबंधित था। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपना पक्ष रखा। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आरोपी पिता को दोषी माना और उसे भी 20 साल की सजा सुनाई। इसके अलावा अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह मामला नाबालिग से दुष्कर्म और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून के तहत विचाराधीन था।

पोक्सो कानून के तहत सख्त कार्रवाई

पोक्सो कोर्ट में ऐसे मामलों की सुनवाई का उद्देश्य बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को कानून के तहत गंभीरता से देखना है। इस मामले में अदालत के फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों में दोष सिद्ध होने पर कठोर सजा का प्रावधान लागू किया जा सकता है। विशेष रूप से दूसरे मामले में आरोपी और पीड़िता के बीच पारिवारिक संबंध होने के कारण मामला और संवेदनशील था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया और दोषी को लंबी अवधि की कैद की सजा दी।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर अहम संदेश

हिमाचल प्रदेश में सामने आए इन दोनों मामलों ने बच्चों की सुरक्षा और उनके खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर गंभीर चिंता को सामने रखा है। पहला मामला बताता है कि दूसरे स्थान से इलाज के लिए आए बच्चों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जबकि दूसरे मामले में पारिवारिक वातावरण में बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा सामने आया। ऐसे मामलों में पुलिस जांच, गवाहों के बयान, चिकित्सकीय और अन्य उपलब्ध साक्ष्य अदालत के सामने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कानून का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देना और दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

Read Also: सिरमौर में 24 वर्षीय प्रधान का फैसला, शादी में फिजूलखर्ची पर 51 हजार जुर्माना

अदालत ने कितनी सजा सुनाई?

रामपुर की विशेष पोक्सो अदालत ने दोनों मामलों में दोषियों को 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। पहले मामले में दोषी पर 5 हजार रुपये और दूसरे मामले में 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

पहला मामला किससे जुड़ा था?

पहला मामला इलाज के लिए नेपाल से हिमाचल आई एक नाबालिग से संबंधित था। अभियोजन के अनुसार, उसकी मां के बाहर जाने के दौरान आरोपी ने अपराध किया था। बच्ची ने फोन के जरिए अपनी मां को सूचना दी, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

#हिमाचल प्रदेश #ब्रेकिंग न्यूज़ #ताज़ा खबरें #भारत समाचार
अनुच्छेद
प्रायोजित
ट्रेंडिंग खबरें
सिरमौर में 24 वर्षीय प्रधान का फैसला, शादी में फिजूलखर्ची पर 51 हजार जुर्माना मोनिका ठाकुर ने CSIR NET JRF में हासिल की ऑल इंडिया 65वीं रैंक, सराज का नाम किया रोशन 1 सितंबर 1972 को कांगड़ा से अलग बना था हमीरपुर जिला, जानें इतिहास बिजली महादेव मंदिर में चला सफाई अभियान, 2 क्विंटल प्लास्टिक कचरा हटाया हिमाचल में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज नेपाल में फंसे हिमाचलियों की जानकारी दें, प्रशासन ने जारी किए निर्देश मणिमहेश यात्रा के पहले दिन 253 श्रद्धालु हुए रवाना, 20 सितंबर तक चलेगी यात्रा हिमाचल में स्वाइन फ्लू की दस्तक, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज