सखोली पंचायत का फैसला, शादी में फिजूलखर्ची पर 51 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान
सखोली पंचायत का फैसला, शादी में फिजूलखर्ची पर 51 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान

Author : Rajesh Vyas

Sept. 29, 2026 4:44 p.m. 138

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र की सखोली ग्राम पंचायत ने विवाह समारोहों में बढ़ते दिखावे और अनावश्यक खर्च को सीमित करने के लिए कई सामाजिक नियम तय किए हैं। पंचायत के इन निर्णयों में शादी में दुल्हन के आभूषणों से लेकर बारात में शामिल होने वाले वाहनों की संख्या और कुछ महंगी रस्मों को सीमित करने का फैसला शामिल है। नियमों का उल्लंघन करने पर 51 हजार रुपये के आर्थिक दंड और पूरी पंचायत के लिए सामूहिक भोज का प्रावधान रखा गया है।

24 वर्षीय प्रधान की पहल

सखोली पंचायत के 24 वर्षीय प्रधान कमलेश चौहान की अध्यक्षता में लिए गए इस फैसले का उद्देश्य विवाह समारोहों में होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करना और परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को घटाना बताया गया है। उपलब्ध पंचायत चुनाव संबंधी जानकारी के अनुसार कमलेश सखोली पंचायत के प्रधान पद पर निर्विरोध चुने गए थे। पंचायत की ओर से तय सामाजिक नियमों में शादी को सादगीपूर्ण तरीके से आयोजित करने पर जोर दिया गया है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि सामाजिक दिखावे के कारण परिवारों पर अतिरिक्त खर्च का दबाव बढ़ता है, इसलिए ऐसे खर्चों को सीमित करने का प्रयास किया गया है।

Read Also: 6 माह की मासूम की मौत से सोलन में सनसनी, मां पर हत्या का आरोप, फिर खुद दी जान

दुल्हन के आभूषण भी किए सीमित

पंचायत के फैसले के अनुसार शादी के दौरान दुल्हन के लिए आभूषणों को सीमित किया गया है। हालिया रिपोर्टों में मंगलसूत्र, नाक की तीली या नथ और कानों के झुमके तक आभूषण सीमित करने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य भारी और महंगे आभूषणों पर होने वाले अतिरिक्त खर्च को कम करना बताया गया है।

बारात में अधिकतम 10 वाहन

विवाह समारोह को सादगीपूर्ण रखने के लिए पंचायत ने बारात में शामिल होने वाले वाहनों की संख्या भी तय की है। पंचायत के अनुसार बारात में अधिकतम 10 वाहन ही शामिल हो सकेंगे। इसके अलावा शादी से जुड़ी कुछ महंगी पारंपरिक रस्मों को भी सीमित या बंद करने का निर्णय लिया गया है।

मामा की रस्म और महंगे उपहारों पर रोक

पंचायत ने शादी में होने वाले मामा खर्च को भी सीमित किया है। इसके तहत केवल सगा मामा रस्म में शामिल होगा और बकरा या महंगे उपहार देने जैसी परंपराओं पर रोक लगाने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही बुलडोज और गेरू फेरनू जैसी रस्मों को भी बंद करने की बात सामने आई है।

नियम तोड़ने पर 51 हजार रुपये और सामूहिक भोज

सखोली पंचायत के फैसले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है। पंचायत के तय सामाजिक नियमों का उल्लंघन करने वाले परिवार पर 51 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही संबंधित परिवार को पूरी पंचायत के लिए सामूहिक भोज भी करवाना होगा। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, सामूहिक भोज की व्यवस्था नहीं करने पर पंचायत स्तर पर सामाजिक बहिष्कार जैसी अतिरिक्त शर्त का भी उल्लेख किया गया है। पंचायत के इन निर्णयों का मुख्य उद्देश्य विवाह समारोहों में सादगी को बढ़ावा देना, परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ कम करना और सामाजिक स्तर पर समानता तथा आपसी सहयोग को बढ़ावा देना बताया गया है। सखोली पंचायत के ये फैसले अब गिरिपार क्षेत्र के बाहर भी चर्चा में हैं।

#हिमाचल प्रदेश #ब्रेकिंग न्यूज़ #राजनीति #ताज़ा खबरें #सिरमौर
अनुच्छेद
प्रायोजित
ट्रेंडिंग खबरें
सिरमौर में 24 वर्षीय प्रधान का फैसला, शादी में फिजूलखर्ची पर 51 हजार जुर्माना मोनिका ठाकुर ने CSIR NET JRF में हासिल की ऑल इंडिया 65वीं रैंक, सराज का नाम किया रोशन 1 सितंबर 1972 को कांगड़ा से अलग बना था हमीरपुर जिला, जानें इतिहास बिजली महादेव मंदिर में चला सफाई अभियान, 2 क्विंटल प्लास्टिक कचरा हटाया हिमाचल में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज नेपाल में फंसे हिमाचलियों की जानकारी दें, प्रशासन ने जारी किए निर्देश मणिमहेश यात्रा के पहले दिन 253 श्रद्धालु हुए रवाना, 20 सितंबर तक चलेगी यात्रा हिमाचल में स्वाइन फ्लू की दस्तक, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज