नाबालिग से छेड़छाड़ मामले में दोषी को एक साल की सजा
नाबालिग से छेड़छाड़ मामले में दोषी को एक साल की सजा

Post by : Himachal Bureau

Aug. 7, 2026 2:55 p.m. 142

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय किन्नौर, रामपुर ने नाबालिग से छेड़छाड़ और POCSO Act के तहत दर्ज मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी सन्नी नेगी (23 वर्ष), निवासी गांव कोठी, तहसील कल्पा, जिला किन्नौर को दोषी करार देते हुए एक साल के कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले को नाबालिगों की सुरक्षा और अपराधों पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। न्यायालय ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया।

2023 में दर्ज हुआ था मामला

जानकारी के अनुसार यह मामला 8 दिसंबर 2023 का है। शिकायत के मुताबिक, रात करीब 10 बजे आरोपी अपने एक अन्य साथी के साथ पीड़िता के घर के पास सड़क पर वाहन खड़ा कर वहां पहुंचा था। आरोप है कि इस दौरान आरोपी ने पीड़िता और उसके परिवार के साथ अभद्र व्यवहार किया, गाली-गलौच की और घर पर पत्थर भी फेंके। घटना के बाद परिवार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

जांच में सामने आई पुरानी हरकतें

पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी पहले भी नाबालिग पीड़िता को परेशान करता था। जांच में पता चला कि आरोपी रास्ते में आते-जाते पीड़िता के साथ छेड़छाड़ करता था। बताया गया कि घटना के शुरुआती दौर में पीड़िता ने मामले को आगे नहीं बढ़ाया, लेकिन जब आरोपी की हरकतें बढ़ गईं और मामला घर तक पहुंच गया तो परिवार ने पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र पेश किया।

अदालत ने सुनाई सजा

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने सभी जरूरी तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। उप जिला न्यायवादी कमल चंदेल ने बताया कि न्यायालय ने आरोपी को विभिन्न धाराओं के तहत एक साल के कारावास और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर सख्त कानून

देश में बच्चों और नाबालिगों की सुरक्षा के लिए POCSO Law बनाया गया है। इस कानून के तहत नाबालिगों के साथ यौन अपराधों और उत्पीड़न के मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। कानून का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित माहौल देना और अपराध करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना है। ऐसे मामलों में पुलिस और न्यायालय तेजी से कार्रवाई करने पर जोर देते हैं।

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समाज में जागरूकता जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए परिवार और समाज को जागरूक रहना जरूरी है। किसी भी तरह की परेशानी या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को देनी चाहिए। इस मामले में अदालत के फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिला है और समाज में यह संदेश गया है कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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