Author : Man Singh
शिमला जिले के जाठिया देवी क्षेत्र में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप शिमोगा परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी नाराज़गी देखने को मिल रही है। भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों को लेकर क्षेत्रवासियों ने खुलकर अपना विरोध दर्ज करवाया है। लोगों का कहना है कि इस परियोजना के नाम पर उनकी आम जमीन और निजी भूमि को अधिग्रहित करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे उनके पारंपरिक अधिकारों और आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि जब हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के दौरान स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे, उस समय लगभग 260 बीघा भूमि हिमुडा के नाम की गई थी। उस समय सिंगापुर की एक कंपनी के साथ एमओयू भी साइन हुआ था, जिसके तहत यहां एक आधुनिक टाउनशिप विकसित की जानी थी। हालांकि, बाद में सरकार बदलने के साथ यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई।
कुछ समय पश्चात कांग्रेस सरकार के पुनः सत्ता में आने पर इस परियोजना को फिर से पुनर्जीवित किया गया। वर्तमान में इसके डीपी के रूप में आदरणीय धर्माणी जी इस परियोजना पर कार्य कर रहे हैं, जिसे लेकर लोगों ने उनके प्रयासों की सराहना भी की है। बावजूद इसके, स्थानीय जनता की सबसे बड़ी आपत्ति इस बात को लेकर है कि अब परियोजना के दायरे को बढ़ाकर लगभग 1200 बीघा भूमि तक विस्तारित करने की बात की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रस्तावित भूमि में न केवल निजी जमीन शामिल है, बल्कि आम उपयोग की भूमि भी है, जिस पर वर्षों से लोगों के सामूहिक अधिकार चले आ रहे हैं। ऐसे में लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 12 के तहत किसी भी तरह का जबरन अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस पूरे मामले पर हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री श्री विक्रमादित्य सिंह ने भी स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी सूरत में लोगों की एक इंच जमीन भी जबरन अधिग्रहित नहीं करेगी। यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से और आपसी बातचीत के आधार पर अपनी जमीन देना चाहता है, तो सरकार उसके लिए तैयार है, लेकिन किसी पर कोई दबाव नहीं बनाया जाएगा।
मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने यह भी बताया कि उन्होंने इस विषय में हिमुडा के सीईओ से चर्चा की है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र उनका निर्वाचन क्षेत्र होने के साथ-साथ यहां के लोगों की उन्नति और हितों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने दो टूक कहा कि सैटेलाइट टाउनशिप का निर्माण जरूर हो, लेकिन इसमें क्षेत्र के किसानों, बागवानों और स्थानीय लोगों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जानी चाहिए।
जाठिया देवी क्षेत्र के लोगों द्वारा इस विषय पर जो प्रस्ताव पारित किया गया है, उसे मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने उचित और सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं का सम्मान करना एक जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है और सरकार इस दिशा में पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करेगी।
इसके साथ ही मंत्री ने नेशनल फ्लावर रोड और पीएनजी सड़कों से जुड़ी समस्याओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सड़कों के निर्माण के दौरान मलबे की डंपिंग नदियों और नालों में नहीं होनी चाहिए। इसके लिए विशेष रूप से टनल निर्माण पर जोर दिया जाएगा, ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे।
उन्होंने यह भी कहा कि फोरलेन परियोजनाओं के कारण प्रदेश को पहले ही काफी नुकसान झेलना पड़ा है। दिल्ली-सैंज और रामपुर से जुड़ी परियोजनाओं की जो प्रस्ताव उन्हें प्राप्त हुए हैं, उनमें अधिक से अधिक टनल निर्माण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 1400 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिसके लिए टनल की डीपीआर तैयार की जाएगी और उसे संबंधित एजेंसियों द्वारा लागू किया जाएगा।
मंत्री ने आश्वासन दिया कि पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। माइनिंग और डंपिंग से जुड़े सभी कार्यों को नियमों के अनुसार और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि आम जनता और प्रकृति दोनों को नुकसान न पहुंचे।
कुल मिलाकर, सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना को लेकर जाठिया देवी क्षेत्र में जनभावनाएं स्पष्ट हैं। लोग विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन वे अपने अधिकारों, भूमि और पर्यावरण के संरक्षण के साथ ही किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
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