Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत कृषि उत्पादों पर शून्य आयात शुल्क (Zero Import Duty) की संभावना पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह का निर्णय देश की कृषि अर्थव्यवस्था को अस्थिर और कमजोर स्थिति में डाल सकता है। उनका कहना है कि यदि यह फैसला बिना सार्वजनिक चर्चा, संसद में बहस और किसान संगठनों से संवाद के लिया जाता है, तो यह करोड़ों किसानों, बागवानों और कृषि मजदूरों के हितों के खिलाफ होगा।
मंत्री ने कहा कि भारत की कृषि व्यवस्था आज भी छोटे और सीमांत किसानों पर आधारित है। ऐसे में उन्हें विकसित देशों के भारी सब्सिडी वाले और कॉरपोरेट नियंत्रित कृषि क्षेत्र से सीधे प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूर करना आर्थिक दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि अमेरिकी कृषि उत्पाद जैसे अनाज, तिलहन, दालें, फल, सब्जियां और डेयरी उत्पाद न्यूनतम या शून्य शुल्क पर भारत में आते हैं, तो इससे घरेलू बाजार में कीमतों में गिरावट आएगी और किसानों की आय पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
विक्रमादित्य सिंह ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने अब तक इस समझौते का आधिकारिक मसौदा सार्वजनिक नहीं किया है और यह स्पष्ट नहीं किया कि किन कृषि उत्पादों को शून्य शुल्क के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां अमेरिकी कृषि सचिव इस समझौते के फायदे अपने किसानों को बता रहे हैं, वहीं भारत सरकार की चुप्पी किसानों को असमंजस में डाल रही है। पहले से बढ़ती लागत, प्राकृतिक आपदाओं और न्यूनतम समर्थन मूल्य में ठहराव के बीच किसान पहले ही चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत संसद में विस्तृत चर्चा, कृषि प्रधान राज्यों के मुख्यमंत्रियों से परामर्श और किसान संगठनों तथा विशेषज्ञों की राय लेना जरूरी है। उनका आरोप है कि इस तरह के फैसले बंद कमरों में लिए जा रहे हैं और किसानों को केवल परिणाम भुगतने के लिए छोड़ दिया जा रहा है।
वहीं, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा कृषि और डेयरी क्षेत्रों के हितों की रक्षा की है। उन्होंने दावा किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में इन संवेदनशील क्षेत्रों का पूरा ध्यान रखा गया है। गोयल ने कहा कि इस समझौते से एमएसएमई, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर और मरीन सेक्टर सहित कई क्षेत्रों को नए अवसर मिलेंगे और देश के निर्यात तथा तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार समझौते से वैश्विक सप्लाई चेन और निवेश के नए अवसर खुलेंगे, जिससे रोजगार सृजन में मदद मिलेगी। हालांकि, इस समझौते को लेकर राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर बहस तेज हो गई है और कृषि क्षेत्र पर इसके प्रभाव को लेकर चिंताएं लगातार सामने आ रही हैं।
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