Post by : Khushi Joshi
हिमाचल प्रदेश में इस समय सूखा जैसे हालात बने हुए हैं, जिसके कारण कृषि और बागवानी क्षेत्र पर गहरा असर पड़ा है। एक महीने से लगातार बारिश और बर्फबारी के अभाव में, राज्य के सेब के बागीचे सूखे की चपेट में आ गए हैं, जिससे किसानों और बागबानों की चिंता बढ़ गई है। बागबानी विशेषज्ञों का कहना है कि इस सीजन में सेब के पौधों के लिए निर्धारित चिलिंग ऑवर्स पूरी होने का संकट आ सकता है, जिसका सीधा असर फ्लावरिंग (फूलों का खिलना) पर पड़ेगा।
सेब के पौधों के लिए आमतौर पर सात डिग्री सेल्सियस से नीचे तापमान में 800 से 1600 घंटे चिलिंग ऑवर्स की आवश्यकता होती है, ताकि वे सही तरीके से फल दे सकें। लेकिन सूखे के कारण इस साल यह ऑवर्स पूरी नहीं हो पाएंगे, जिससे सेब की फसल पर प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा, नए बागीचे या फलदार पौधों को लगाने के लिए भी पर्याप्त नमी नहीं मिल रही है, जिससे इस काम में भी बाधाएं आ रही हैं।
नवंबर और दिसंबर के महीने में, जब बागीचों में फॉस्फोरस और पोटाश खाद डाली जाती है, तब सूखा पड़ने के कारण यह कार्य भी प्रभावित हो रहा है। नमी की कमी के चलते खाद डालने का काम नहीं हो पा रहा है, जिससे विभिन्न प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा, बागबानी विशेषज्ञों ने किसानों को कुछ कीटों जैसे वूली एफिड, स्केल, टहनियों के छेदक कीट, और माइट ग्रस्त टहनियों को काटकर नष्ट करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि इस समय बागबानों को घावों पर ताजे गोबर, गीली मिट्टी, या चौबाटिया पेस्ट लगाना चाहिए। इसके अलावा, जड़ों को खोदकर जड़ छेदक की सुंडियों को एकत्र कर उनका उपचार भी किया जाना चाहिए।
वर्तमान में बागबानों को सलाह दी गई है कि वे न तो बागीचों में गुड़ाई करें और न ही खाद डालें, क्योंकि नमी की कमी से इन कार्यों का कोई फायदा नहीं होगा। यदि एक हफ्ते के भीतर बारिश नहीं होती है, तो बागबानों को सिंचाई के जरिए गुड़ाई का काम करना पड़ सकता है, लेकिन यह भी काफी मुश्किल हो सकता है।
इसके साथ ही, सूखा पड़ने के कारण सेब के पौधे कैंकर रोग की चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बचाव के लिए तने पर बोर्डो पेंट या ताजे गोबर और मिट्टी का लेप लगाना चाहिए, ताकि सूर्य की किरणों से पौधों को नुकसान न हो। कांट-छांट के बाद बोर्डो मिश्रण का स्प्रे करना भी जरूरी है, और नए पौधे रोपित करने के बाद सिंचाई जरूर करनी चाहिए।
यह स्थिति हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागबानों के लिए चुनौतीपूर्ण है, जो इस समय सूखे और नमी की कमी से जूझ रहे हैं। उनके लिए यह जरूरी है कि वे विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार कदम उठाएं, ताकि भविष्य में फसलों की बेहतर उपज मिल सके
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