मंडी में शराब पीकर स्कूल जाते हुए हैडमास्टर को निलंबित
मंडी में शराब पीकर स्कूल जाते हुए हैडमास्टर को निलंबित

Post by : Khushi Joshi

Nov. 19, 2025 12:40 p.m. 3441

मंडी जिले के चच्योट क्षेत्र में स्थित एक सरकारी स्कूल के हैडमास्टर को शराब के नशे में स्कूल जाते हुए देखा गया। यह घटना उस समय सामने आई जब कुछ स्थानीय निवासियों ने शराब पीकर स्कूल आते समय शिक्षक की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। वीडियो में साफ देखा जा सकता था कि हैडमास्टर पूरी तरह से नशे में झूलते हुए सड़कों पर चल रहे थे, जबकि पास ही बच्चे स्कूल जाने के लिए तैयार हो रहे थे। वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया, और इसके तुरंत बाद कार्रवाई की गई।

शिक्षक के शराब पीकर स्कूल पहुंचने के मामले को शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद, विभाग ने शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके अलावा, उसे मुख्यालय शिक्षा खंड चौंतड़ा-दो के खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी लडभड़ोल कार्यालय में तैनात किया गया है, जहां उसे अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना न केवल शिक्षक के लिए, बल्कि पूरे शैक्षिक समुदाय के लिए शर्मनाक है। उपनिदेशक हरि चंद ने बताया कि ऐसे मामलों में विभाग का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आचरण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है, जो शिक्षक के आचरण की पूरी जांच करेगी और आगे की कार्रवाई तय करेगी।

इस घटना ने यह भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि स्कूलों में बच्चों को शैक्षिक और नैतिक रूप से क्या संदेश दिया जा रहा है, यदि एक शिक्षक खुद इस तरह के व्यवहार में लिप्त हो। यह घटना स्थानीय शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान छोड़ती है, क्योंकि शिक्षक अपने विद्यार्थियों के लिए आदर्श होते हैं। शिक्षक का कार्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि छात्रों को सही मार्गदर्शन और जीवन के अच्छे मूल्यों का पालन करना भी है।

यह घटना पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है और समाज में गलत संदेश भी भेज रही है। बच्चों को ऐसे उदाहरण नहीं मिलना चाहिए जो उन्हें गलत दिशा में ले जाएं। यह घटना शिक्षा विभाग के लिए एक चेतावनी है कि उन्हें ऐसे मामलों में शीघ्र और कठोर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के घटनाओं से बचा जा सके।

अंत में, यह घटना यह दर्शाती है कि शिक्षा विभाग को अपने कर्मचारियों के आचरण पर अधिक कड़ी नजर रखनी होगी ताकि बच्चों को सही और अनुशासित शिक्षा मिल सके

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