सैंज के पटाहरा गांव में हूम उत्सव की धूम, सैकड़ों मशालों के बीच निभाई देव परंपरा
सैंज के पटाहरा गांव में हूम उत्सव की धूम, सैकड़ों मशालों के बीच निभाई देव परंपरा

Author : Prem Sagar

Sept. 11, 2026 6:07 p.m. 115

सैंज घाटी की बनोगी कोठी के पटाहरा गांव में भादों अमावस्या के अवसर पर पारंपरिक हूम उत्सव श्रद्धा और धार्मिक आस्था के साथ संपन्न हुआ। माता दुर्गा बनोगी देहूरी के इस आयोजन में सैंज घाटी के अलावा दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने माता रानी के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा की कामना की।

सदियों पुरानी देव परंपरा का हुआ निर्वहन

स्थानीय मान्यता के अनुसार भादों अमावस्या के दिन माता भगवती ज्वाला स्वरूप धारण कर क्षेत्र की रक्षा करती हैं और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। माता रानी के गुर डोलाराम ने बताया कि हूम उत्सव की यह परंपरा सदियों से लोककल्याण और देव संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से निभाई जा रही है। मंदिर में वैदिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना के बाद देव खेल के माध्यम से देव कार्य शुरू हुआ। इस दौरान माता दुर्गा, मशानी वीर, पंचवीर, देवता जेहर, वोदली माता और देवता ब्रह्मा के गुरों ने पारंपरिक देव कार्य में हिस्सा लिया।

Read Also: हमीरपुर को नशामुक्त बनाने में सभी दें सक्रिय योगदान : अभिषेक गर्ग

देव कार्य के बाद निकली भव्य देवरथ यात्रा

देव कार्य के दौरान कई श्रद्धालुओं ने गुर के माध्यम से आसुरी शक्तियों के प्रभाव से मुक्ति दिलाए जाने की परंपरा में हिस्सा लिया। इसके बाद माता रानी की भव्य देवरथ यात्रा निकाली गई। सैकड़ों जलती मशालों के बीच देवरथ देहूरी मंदिर पहुंचा, जहां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ देव परंपराओं को आगे बढ़ाया गया। इसके बाद मुख्य कारकून मन्याशी गांव पहुंचे। यहां हारियानों ने करीब 40 फुट लंबी विशाल मशाल को कंधों पर उठाया और पंडीर ऋषि मंदिर की परिक्रमा की। परिक्रमा के बाद विशाल मशाल को विधिवत स्थापित किया गया।

रातभर चलता रहा देव नाटी और धार्मिक अनुष्ठान

हूम उत्सव के दौरान पूरी रात देव नाटी और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी रहा। श्रद्धालुओं ने देर रात तक आयोजन में भाग लिया और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त किया। शुक्रवार सुबह माता दुर्गा और पंडीर ऋषि के समक्ष हवन और पूजा-अर्चना के बाद हूम उत्सव का विधिवत समापन हुआ। उत्सव में उमड़ी भारी भीड़ ने सैंज घाटी की समृद्ध देव संस्कृति, लोक आस्था और सामाजिक एकता की परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

#हिमाचल प्रदेश #ब्रेकिंग न्यूज़ #मनोरंजन #ताज़ा खबरें #हिमाचल प्रदेश संस्कृति #हिमाचल मेले और त्योहार #कुल्लू
अनुच्छेद
प्रायोजित
ट्रेंडिंग खबरें
1 सितंबर 1972 को कांगड़ा से अलग बना था हमीरपुर जिला, जानें इतिहास बिजली महादेव मंदिर में चला सफाई अभियान, 2 क्विंटल प्लास्टिक कचरा हटाया हिमाचल में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज नेपाल में फंसे हिमाचलियों की जानकारी दें, प्रशासन ने जारी किए निर्देश मणिमहेश यात्रा के पहले दिन 253 श्रद्धालु हुए रवाना, 20 सितंबर तक चलेगी यात्रा हिमाचल में स्वाइन फ्लू की दस्तक, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज हथलौंण की बेटी शिल्पा सोनी का चयन, बंगाणा में बनेंगी रसायन प्रवक्ता हिमाचल में 4.0 तीव्रता का भूकंप, शिमला समेत 5 जिलों में झटके