तीर्थन घाटी में पोर्टेबल बायोमास बुखारी का लाइव प्रदर्शन, कचरे से बनेगी सस्ती ऊर्जा
तीर्थन घाटी में पोर्टेबल बायोमास बुखारी का लाइव प्रदर्शन, कचरे से बनेगी सस्ती ऊर्जा

Author : Prem Sagar

March 16, 2026 10:48 a.m. 176

कुल्लू जिले की तीर्थन घाटी में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए रविवार को बायोमास ऊर्जा प्रणाली पर आधारित एक पोर्टेबल हाईटेक बुखारी का प्रदर्शन किया गया। इस डेमो में बताया गया कि कृषि अपशिष्ट और लकड़ी के छोटे टुकड़ों जैसे स्थानीय ईंधन का उपयोग करके इस बुखारी से खाना बनाया जा सकता है, कमरे को गर्म रखा जा सकता है और पानी भी गर्म किया जा सकता है। यानी एक ही उपकरण से कई काम किए जा सकते हैं।

यह प्रदर्शन प्रज्ञानम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, हमीरपुर के सहयोग से आयोजित किया गया। कंपनी के को-फाउंडर अश्वनी शर्मा ने बताया कि तीर्थन घाटी के गुशैनी नागनी स्थित कलियुगा रिसॉर्ट और बठाहड़ क्षेत्र में लोगों को इस प्रणाली का लाइव डेमो दिखाया गया। इस दौरान पर्यटन कारोबारियों, होमस्टे संचालकों और स्थानीय लोगों को इस नई तकनीक की कार्यप्रणाली और इसके फायदे के बारे में जानकारी दी गई।

हमीरपुर जिले के बाहली गांव के रहने वाले रोहित शर्मा और अश्वनी शर्मा ने बताया कि पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने और पर्यावरण की रक्षा के लिए उन्होंने यह नया मॉडल तैयार किया है। उन्होंने पारंपरिक तंदूर बुखारी को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर एक हाईटेक पोर्टेबल बुखारी बनाई है।

इस बुखारी की खास बात यह है कि इसमें ओवन, स्टीमर और गीजर जैसी कई सुविधाएँ एक साथ मिलती हैं। यह लकड़ी की खपत को लगभग 40 प्रतिशत तक कम कर सकती है। इस बुखारी से खाना बनाने के साथ-साथ पानी गर्म किया जा सकता है और कमरे को भी गर्म रखा जा सकता है। एक बार खाना बनाने के बाद यह कमरा लगभग 7 से 8 घंटे तक गर्म रख सकती है। करीब तीन फुट ऊंची इस बुखारी में लगभग 20 लीटर पानी गर्म करने की क्षमता है और इसमें पानी निकालने के लिए नल भी लगाया गया है। स्टीम के लिए भी अलग सिस्टम दिया गया है।

इस बुखारी को आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए इसमें चार पहिए लगाए गए हैं, जिससे यह पूरी तरह पोर्टेबल बन गई है।

रोहित शर्मा और अश्वनी शर्मा ने इस बुखारी का प्रोटोटाइप तैयार कर इसे एनआईटी हमीरपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्टार्टअप शिखर सम्मेलन 2026 में भी पेश किया था। इस प्रोटोटाइप को इन्क्यूबेशन के लिए चुना गया और प्रतियोगिता में इसे दूसरा स्थान मिला। इसके लिए दोनों युवकों को 30 हजार रुपये का पुरस्कार भी दिया गया।

उन्होंने बताया कि बाजार में मिलने वाली टर्किश बुखारी कुछ सुविधाएँ देती है, लेकिन उसमें पानी रखने और इनबिल्ट स्टीमर जैसी सुविधाएँ नहीं होतीं। टर्किश बुखारी की कीमत लगभग एक लाख रुपये तक होती है, जबकि इस नई हाईटेक बुखारी की कीमत करीब 40 हजार रुपये रखी गई है। इसे ऊर्जा की बचत और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इन्क्यूबेशन सेंटर में इसे मुफ्त इन्क्यूबेशन सुविधा दी जाएगी और प्रोटोटाइप को आगे विकसित करने तथा पेटेंट फाइल करने में भी मदद मिलेगी।

तीर्थन घाटी में हुए इस डेमो के दौरान स्थानीय पर्यटन कारोबारियों और होमस्टे संचालकों ने इस तकनीक में खास रुचि दिखाई। उनका कहना है कि अगर यह प्रणाली घाटी में अपनाई जाती है तो इससे एलपीजी की बढ़ती कीमतों से राहत मिलेगी और पर्यटन क्षेत्र को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा का नया विकल्प मिल सकेगा। इस अवसर पर तीर्थन संरक्षण एवं पर्यटन विकास एसोसिएशन के अध्यक्ष वरुण भारती, उपाध्यक्ष अमन नेगी, ग्राम पंचायत मशयार के पूर्व उप प्रधान और पर्यटन कारोबारी ठेवा राम सहित कई लोग मौजूद रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि अपशिष्ट को स्वच्छ ऊर्जा में बदलने वाली यह तकनीक भविष्य में ग्रामीण इलाकों और पर्यटन स्थलों के लिए एक अच्छा समाधान बन सकती है। खासकर पहाड़ी और ठंडे क्षेत्रों में यह तकनीक ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

प्रज्ञानम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के को-फाउंडर अश्वनी शर्मा ने बताया कि अभी इस बुखारी-तंदूर का बेस मॉडल तैयार किया गया है और लोगों को दिखाया जा रहा है। ग्राहकों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर इसमें और सुविधाएँ जोड़ी जाएँगी और इसे और किफायती बनाया जाएगा। उनका कहना है कि जल्द ही इस तंदूर के अलग-अलग मॉडल बाजार में उपलब्ध कराए जाएंगे। इच्छुक लोग अधिक जानकारी के लिए कंपनी के फोन नंबर 8219501996 पर संपर्क कर सकते हैं।

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