1100 से घटकर 600 रह गए विद्यार्थी, बंजार महाविद्यालय में शिक्षा संकट गहराया
1100 से घटकर 600 रह गए विद्यार्थी, बंजार महाविद्यालय में शिक्षा संकट गहराया

Author : Prem Sagar

March 2, 2026 11:49 a.m. 1401

जिला कुल्लू के बंजार विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राजकीय महाविद्यालय बंजार में शिक्षकों के रिक्त पदों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अंग्रेज़ी, केमिस्ट्री और संस्कृत जैसे महत्वपूर्ण विषयों में प्रवक्ताओं के पद पिछले लगभग एक वर्ष से खाली पड़े हैं। इस स्थिति को लेकर क्षेत्र के विधायक सुरेंद्र शौरी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार की चुप्पी न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।

महाविद्यालय में नियमित शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। विद्यार्थियों को या तो अतिथि शिक्षकों के भरोसे पढ़ना पड़ रहा है या फिर कई विषयों की पढ़ाई बाधित हो रही है। इससे न केवल परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हो रही है, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।

एक समय था जब बंजार महाविद्यालय में लगभग 1100 विद्यार्थी अध्ययनरत थे। आज यह संख्या घटकर मात्र 600 के आसपास रह गई है। यह गिरावट केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को दर्शाती है। अभिभावकों का कहना है कि जब कॉलेज में विषय विशेषज्ञ शिक्षक ही उपलब्ध नहीं होंगे, तो वे अपने बच्चों को यहां पढ़ाने का जोखिम क्यों लें। परिणामस्वरूप कई छात्र अन्य महाविद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की पहुंच कमजोर होती जा रही है।

विधायक सुरेंद्र शौरी ने आरोप लगाया कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि बंजार क्षेत्र की स्पष्ट उपेक्षा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार चाहती तो अस्थायी व्यवस्था के तहत प्रतिनियुक्ति के माध्यम से समस्या का समाधान किया जा सकता था।

निकटवर्ती कुल्लू महाविद्यालय में केमिस्ट्री विषय के सात प्रवक्ता कार्यरत हैं। यदि उनमें से एक या दो को प्रतिनियुक्ति पर बंजार भेज दिया जाता, तो कम से कम विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होती। लेकिन सरकार की निष्क्रियता से यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

महाविद्यालय में अंग्रेज़ी और संस्कृत जैसे विषयों के प्रवक्ता न होने से कला और विज्ञान दोनों संकायों के विद्यार्थी प्रभावित हो रहे हैं। अंग्रेज़ी विषय लगभग सभी पाठ्यक्रमों के लिए आवश्यक है, जबकि केमिस्ट्री विज्ञान संकाय के लिए मुख्य विषय है। संस्कृत विषय भी कई विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।

इन विषयों की नियमित कक्षाएं न होने से विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर गिरने का खतरा बढ़ रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी प्रभावित हो रही है। कई छात्र-छात्राएं मानसिक दबाव में हैं, क्योंकि उन्हें अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता महसूस हो रही है।

विधायक सुरेंद्र शौरी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार शीघ्र ही रिक्त पदों को नहीं भरती और अंतरिम व्यवस्था नहीं करती, तो वे छात्र हित में व्यापक जन आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि सरकार को यह समझना होगा कि युवाओं का भविष्य किसी भी सरकार की प्राथमिकता होना चाहिए। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन तेज हो सकते हैं।

महाविद्यालय के छात्र और अभिभावक दोनों ही चिंतित हैं। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को दूरदराज के क्षेत्रों में भेजने के लिए मजबूर हो रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध न होना क्षेत्र के विकास के लिए भी नुकसानदायक है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में महाविद्यालय की स्थिति और भी कमजोर हो सकती है।

बंजार क्षेत्र के लोगों ने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए। साथ ही जब तक स्थायी नियुक्ति नहीं होती, तब तक प्रतिनियुक्ति या अतिथि शिक्षकों के माध्यम से पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रखने की व्यवस्था की जाए।

यह मामला केवल एक महाविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की व्यापक तस्वीर भी प्रस्तुत करता है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। बंजार महाविद्यालय में शिक्षकों की कमी ने शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। अब देखना यह है कि सरकार इस मुद्दे पर कितनी गंभीरता दिखाती है और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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